New Delhi नई दिल्ली: सोमवार को NIA की एक अदालत ने 'वॉइस ऑफ़ हिंद' आतंकी साज़िश मामले में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के चार सदस्यों को छह साल तक की अलग-अलग अवधि की सज़ा सुनाई। NIA के एक बयान के अनुसार, उमर निसार उर्फ़ कासिम खुरासानी, रमीज़ अहमद लोन और तनवीर अहमद भट में से हर एक को छह साल की कठोर सज़ा सुनाई गई, जबकि अफ़शान परवेज़ जराबी को पांच साल की कठोर सज़ा और क्रमशः 36,000 रुपये, 31,000 रुपये, 23,000 रुपये और 9,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
बयान में कहा गया है कि सभी सज़ाएं एक साथ चलेंगी।
विशेष अदालत ने 17 सितंबर को इन चारों आरोपियों को दोषी ठहराया था।NIA ने बताया कि अदालत ने उन्हें आपराधिक साज़िश और 'गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) और 'भारतीय दंड संहिता' (IPC) के तहत कई अपराधों का दोषी पाया। ये अपराध ISIS के प्रचार-प्रसार, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उनकी भर्ती करने, तथा प्रतिबंधित आतंकी संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जुड़े थे। यह मामला 'इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया' (ISIS) द्वारा रची गई उस साज़िश से जुड़ा है, जिसका मकसद भारत में आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और भारतीय राज्य के खिलाफ हिंसक जिहाद छेड़ने के लिए उनकी भर्ती करना था।
आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने बताया कि अलग-अलग संघर्ष वाले इलाकों से काम कर रहे ISIS आतंकवादियों ने भारत में मौजूद ISIS कैडरों के साथ मिलकर, ISIS से जुड़े प्रोपेगैंडा को फैलाने के लिए नकली ऑनलाइन पहचान का इस्तेमाल करते हुए एक नेटवर्क बनाया था।
एजेंसी ने आगे कहा कि इस संगठित ऑनलाइन अभियान के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर आतंकी फंडिंग की गतिविधियां भी चल रही थीं।
NIA की जांच से पता चला कि ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए भारत-केंद्रित ISIS प्रोपेगैंडा मैगज़ीन 'सौत-अल-हिंद (वॉइस ऑफ़ हिंद)' के कंटेंट बनाने, एडिट करने, पब्लिश करने और फैलाने में साइबर संस्थाओं और उनके सहयोगियों की भूमिका थी।
बयान में कहा गया है कि यह नेटवर्क भारतीयों को सीरिया, इराक, अफ़गानिस्तान और अन्य इलाकों में ISIS के संघर्ष वाले क्षेत्रों में तथाकथित "हिजरत" (प्रवास) के लिए प्रेरित करने और उसमें मदद करने में भी शामिल था। जांच के दौरान, NIA ने बहुत सारे ऐसे दस्तावेज़ और डिजिटल सामग्री ज़ब्त की जिनसे अपराध साबित होता है। इनमें ‘वॉइस ऑफ़ हिंद’ की PDF, मारे गए आतंकवादियों के पोस्टर, कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देने वाला साहित्य, ISIS के प्रोपेगैंडा के वेब लिंक, ISIS के झंडे वाली टी-शर्ट, हथियार खरीदने से जुड़ी बातचीत और ऑडियो रिकॉर्डिंग, मीडिया/विचारधारा/मनोवैज्ञानिक युद्ध से जुड़ी सामग्री और ISIS के बैनर/झंडे शामिल थे।
अदालत ने पाया कि ISIS की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में इन चार दोषियों की खास भूमिका थी।
NIA ने बताया कि उमर निसार युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें भर्ती करने के लिए ‘वॉइस ऑफ़ हिंद’ मैगज़ीन, टेलीग्राम और दूसरे ऑनलाइन चैनलों के ज़रिए ISIS की सामग्री फैलाने और प्रचार करने में शामिल पाया गया। एजेंसी ने कहा कि रमीज़ अहमद लोन और तनवीर अहमद भट ISIS की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को ISIS में शामिल होने के लिए कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने में शामिल पाए गए।
जांच एजेंसी ने बताया कि अफ़शान परवेज़ जरबी टेलीग्राम चैनलों के ज़रिए ‘वॉइस ऑफ़ हिंद’ मैगज़ीन के लिए लेख छापने और फैलाने, ISIS की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को ISIS में शामिल होने के लिए बुलाने में शामिल पाया गया। NIA ने कुल आठ आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट और चार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कीं। एजेंसी ने कहा कि जांच से ISIS के ‘वॉइस ऑफ़ हिंद’ मॉड्यूल की गतिविधियों में आरोपियों की भागीदारी और ऑनलाइन गतिविधियों के ज़रिए प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के मक़सद को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका साबित हुई। एजेंसी ने आगे कहा कि बाकी आरोपियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चल रहा है।