नई दिल्ली: इंसानियत और आपसी भरोसे की एक अनोखी मिसाल देश की राजधानी दिल्ली में देखने को मिली है। चार अलग-अलग राज्यों के चार परिवारों ने रिश्तों, धर्म और भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे के मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए किडनी दान की। इस किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट के जरिए चार गंभीर मरीजों को नई जिंदगी मिली।

दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में हुई इस जटिल प्रक्रिया में जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, बिहार और नागालैंड के चार परिवार शामिल हुए। इन परिवारों के डोनर अपने-अपने मरीजों से मेडिकल रूप से मैच नहीं कर रहे थे, जिसके बाद डॉक्टरों ने पेयर्ड किडनी एक्सचेंज यानी किडनी अदला-बदली की योजना बनाई।
चार परिवार, चार मरीज और एक मानवीय पहल
इस अनोखे ट्रांसप्लांट में अलग-अलग राज्यों से आए मरीजों और उनके परिजनों ने एक-दूसरे पर भरोसा किया। किसी का डोनर ब्लड ग्रुप या अन्य मेडिकल कारणों से अपने परिवार के सदस्य के लिए उपयुक्त नहीं था, इसलिए दूसरे परिवार के मरीज के लिए किडनी दान की गई। बदले में दूसरे परिवार के डोनर ने उनके मरीज की मदद की। इस प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया कि किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए इंसानियत सबसे बड़ा रिश्ता बन सकती है।
11 घंटे में हुईं 8 सर्जरी
रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए डॉक्टरों की टीम ने कई घंटे तक जटिल सर्जरी की। करीब 11 घंटे चली प्रक्रिया में चार डोनर और चार मरीजों से जुड़ी आठ सर्जरी की गईं। इसके बाद सभी मरीजों को सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसे मामलों में मेडिकल जांच के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। सभी जरूरी मंजूरियों और जांच के बाद ही यह ट्रांसप्लांट संभव हो सका।
धर्म और राज्य की सीमाएं नहीं बनीं बाधा
इस पूरी कहानी की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल परिवार अलग-अलग राज्यों और समुदायों से थे। इसके बावजूद सभी ने एक-दूसरे की जिंदगी बचाने के लिए आगे बढ़कर सहयोग किया। यह घटना समाज को संदेश देती है कि मानवता किसी भी पहचान से बड़ी होती है। एक व्यक्ति की जान बचाने के लिए अनजान लोग भी परिवार जैसा रिश्ता बना सकते हैं।
किडनी स्वैप से मरीजों को मिलती है नई उम्मीद
किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट उन मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद बनता है, जिनके पास डोनर तो होता है लेकिन मेडिकल कारणों से वह सीधे किडनी नहीं दे सकता। ऐसे मामलों में दो या अधिक परिवारों के डोनर और मरीजों के बीच मैचिंग कर अंगों की अदला-बदली की जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया से उन मरीजों को भी जीवनदान मिल सकता है, जो लंबे समय से ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे होते हैं।
चार राज्यों के इन परिवारों ने साबित कर दिया कि इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती। उनकी यह पहल आने वाले समय में अंगदान और किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने वाली मिसाल बन सकती है।
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