NEW DELHI: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान पाकिस्तान के प्रति भारत के नजरिए में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दिखाता है। उनके मुताबिक, इस ऑपरेशन ने साफ संदेश दिया कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले लोग दुनिया में कहीं भी छिपे हों, भारतीय कार्रवाई से बच नहीं सकते।
जनरल नरवणे ने शनिवार को वडोदरा में एक निजी कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद किया गया ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से एक जरूरी और निर्णायक कदम था। उन्होंने कहा कि पहले भारत की सैन्य कार्रवाई मुख्य रूप से सीमा के पास मौजूद आतंकी ठिकानों तक सीमित रहती थी, लेकिन इस बार रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
पाकिस्तान के अंदर तक पहुंची कार्रवाई
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि उरी और पुलवामा हमलों के बाद भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसी कार्रवाई की थी, जिसमें आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकियों के साथ-साथ उनके समर्थकों और मददगारों को भी निशाना बनाया गया।
उन्होंने कहा कि इस बार कार्रवाई सिर्फ नियंत्रण रेखा (LoC) के आसपास तक सीमित नहीं रही, बल्कि पाकिस्तान के अंदर मौजूद उन ठिकानों को भी निशाना बनाया गया जहां से आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलता था।
जनरल नरवणे ने कहा कि मुरीदके और बहावलपुर जैसे स्थानों पर मौजूद आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई ने भारत की नई नीति को दिखाया है। उन्होंने कहा कि अब भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को किसी भी स्थिति में सुरक्षा नहीं मिलेगी।
आतंकवाद के खिलाफ बदली भारत की नीति
जनरल नरवणे ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत के सैन्य और रणनीतिक दृष्टिकोण में बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ हमले के बाद प्रतिक्रिया देने की नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद के स्रोतों और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि भारत ने यह संदेश दिया है कि आतंकवादी गतिविधियों को संरक्षण देने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें आतंकवादियों के खिलाफ सीमा पार जाकर कार्रवाई की बात कही गई थी।
पाकिस्तान भारत की बराबरी नहीं कर सकता: नरवणे
पाकिस्तान के साथ सैन्य तुलना को लेकर पूछे गए सवाल पर पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान भारत का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने लोगों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात कही और कहा कि भारत जरूरत के अनुसार उचित समय पर उचित कदम उठाने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तैयार है।
भारत-चीन संबंधों पर भी रखी राय
पूर्व सेना प्रमुख ने भारत और चीन के बीच संबंधों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत को दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि यह विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं बैठक थी और ऐसी बातचीत पहले भी होती रही है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की मुख्य वजह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का स्पष्ट सीमांकन नहीं होना है, जिसके कारण कई बार दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ जाते हैं।
थिएटर कमांड पर बोले नरवणे
भारतीय सशस्त्र बलों के थिएटराइजेशन को लेकर जनरल नरवणे ने कहा कि यह कोई नया विचार नहीं है। उन्होंने बताया कि इसकी चर्चा कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुई थी और पिछले करीब 25 से 26 वर्षों से इस पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त संचालन क्षमता बढ़ाना जरूरी है।
जनरल एमएम नरवणे के इस बयान को भारत की बदलती सैन्य रणनीति और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उनका बयान ऐसे समय आया है जब भारत अपनी सुरक्षा नीति में आक्रामक और निर्णायक कदमों पर जोर दे रहा है।
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