Delhi दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में संस्कृति को रोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब इस बात पर ध्यान देने का समय है कि संस्कृति के माध्यम से कितनी नौकरियां पैदा की जा रही हैं, मॉनेटाइजेशन से कितने आर्थिक अवसर तैयार हो रहे हैं और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को किस तरह मजबूती मिल रही है। शेखावत ने कहा कि संस्कृति और विरासत को केवल संरक्षण के नजरिए से देखने के बजाय उनके आर्थिक योगदान पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कारीगरों को सशक्त बनाने, होमस्टे को अवसर देने और आर्थिक गतिविधियों को विकेंद्रीकृत करने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक संस्कृति से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संस्कृति से होने वाली कमाई का उपयोग अपनी संस्कृति और विरासत के संरक्षण में किस तरह किया जा सकता है, इस पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने एक ऐसे मॉडल की बात कही जिसमें विकास विरासत की रक्षा करे और विरासत विकास को समृद्ध बनाए। शेखावत ने पर्यटन के आर्थिक लाभ को देश के छोटे शहरों, गांवों, सीमावर्ती क्षेत्रों, आदिवासी समुदायों और कारीगरों तक पहुंचाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों और युवा उद्यमियों के लिए नए अवसर तैयार होने चाहिए। इसके साथ ही कारीगरों की बाजार तक पहुंच और छोटे कारोबारों के लिए वित्तीय अवसरों को बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि हम इस बात पर ध्यान दें कि हम संस्कृति से कितनी नौकरियां पैदा कर रहे हैं, मॉनेटाइजेशन के जरिए आर्थिक अवसर बना रहे हैं, कितनी अर्थव्यवस्था का विकेंद्रीकरण कर रहे हैं, कितने कारीगरों को सशक्त बना रहे हैं और कितने होमस्टे को मौका दे रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इन गतिविधियों से होने वाली आय का इस्तेमाल संस्कृति और विरासत को बचाने में कैसे किया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि इस तरह की चर्चाओं से नई सोच, नई ऊर्जा और नई प्रेरणा मिलती है।
5वां कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 3 से 5 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसका विषय “Resilience in an Age of Flux” रखा गया। कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों और वित्तीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। शेखावत ने कॉन्क्लेव में “Culture as Capital: From Heritage to Horizons” विषय पर संबोधन दिया।
शेखावत के संबोधन का प्रमुख केंद्र संस्कृति को आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन, रोजगार, स्थानीय उद्यमिता और विरासत संरक्षण के साथ जोड़ना रहा। उन्होंने संस्कृति आधारित आर्थिक अवसरों का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
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