तीन देशों के दौरे पर पबित्रा मार्गेरिटा प्रशांत द्वीपीय देशों से बढ़ेगा सहयोग
अपिया/नई दिल्ली। भारत और प्रशांत महासागर क्षेत्र के द्वीपीय देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल शुरू हुई है। विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को समोआ की राजधानी अपिया पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने प्रशांत द्वीपीय क्षेत्र के तीन देशों की आधिकारिक यात्रा का पहला पड़ाव शुरू किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाना, विकास संबंधी साझेदारी को मजबूत करना और आपसी सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा करना है।विदेश मंत्रालय के अनुसार, पबित्रा मार्गेरिटा 16 से 22 अक्टूबर तक समोआ, कुक आइलैंड्स और नाउरू की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वे तीनों देशों के वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और विभिन्न विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
समोआ पहुंचने पर जताई खुशी
समोआ की राजधानी अपिया पहुंचने के बाद विदेश राज्य मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की।उन्होंने लिखा कि समोआ की यात्रा के लिए सुंदर शहर अपिया पहुंचकर उन्हें खुशी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दौरे के दौरान सकारात्मक बातचीत और उच्चस्तरीय मुलाकातों के माध्यम से दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाया जा सकेगा।मार्गेरिटा ने साझा विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों में नई संभावनाओं की तलाश करने की इच्छा भी व्यक्त की।
तीन देशों के नेताओं से करेंगे मुलाकात
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस आधिकारिक यात्रा में समोआ के अलावा कुक आइलैंड्स और नाउरू शामिल हैं।विदेश राज्य मंत्री तीनों देशों के वरिष्ठ राजनीतिक नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों में आपसी सहयोग और साझा विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा होने की संभावना है।इसके अतिरिक्त वे प्रमुख हितधारकों तथा स्थानीय भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।यात्रा के दौरान भारत की सहायता से संचालित विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी निर्धारित है।
प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ बढ़ेगा सहयोग
भारत लंबे समय से प्रशांत महासागर क्षेत्र के द्वीपीय देशों के साथ राजनीतिक और विकास संबंधी सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।इन देशों के साथ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और क्षमता निर्माण शामिल हैं।प्रशांत क्षेत्र के अनेक द्वीपीय देशों को जलवायु परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते जलस्तर और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।ऐसी परिस्थितियों में विकास सहयोग और तकनीकी सहायता से संबंधित साझेदारी इन देशों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारत-प्रशांत सहयोग मंच की अहम भूमिका
पबित्रा मार्गेरिटा की यह यात्रा भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच यानी फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) के अंतर्गत जारी सहयोग को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।इस मंच के माध्यम से भारत और प्रशांत क्षेत्र के द्वीपीय देश साझा हितों से जुड़े विषयों पर बातचीत करते हैं।विदेश मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा यात्रा का उद्देश्य इस मंच के अंतर्गत राजनीतिक संपर्क और विकास साझेदारी को और मजबूत करना है।
2023 के शिखर सम्मेलन से जुड़ी पहल
भारत और प्रशांत द्वीपीय देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मई 2023 में पापुआ न्यू गिनी के पोर्ट मोरेस्बी में तीसरा FIPIC शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था।इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने की थी।सम्मेलन में प्रशांत महासागर क्षेत्र के 14 द्वीपीय देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।इस दौरान भारत ने स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल तकनीक और विकास संबंधी विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था।
भारतीय समुदाय से भी करेंगे संवाद
विदेश राज्य मंत्री अपने दौरे के दौरान प्रशांत द्वीपीय देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।इन मुलाकातों का उद्देश्य भारतीय समुदाय से संपर्क बनाए रखना और द्विपक्षीय संबंधों में उनके योगदान को प्रोत्साहित करना है।साथ ही भारत की सहायता से संचालित परियोजनाओं का निरीक्षण कर उनके कार्यान्वयन की स्थिति को समझने का अवसर भी मिलेगा।
भारत की विदेश नीति में प्रशांत क्षेत्र का महत्व
प्रशांत महासागर क्षेत्र के द्वीपीय देश भारत की व्यापक हिंद-प्रशांत साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।इन देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने से भारत को क्षेत्रीय सहयोग, सतत विकास और वैश्विक चुनौतियों पर संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।पबित्रा मार्गेरिटा की तीन देशों की यह यात्रा इन्हीं उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की पहल है। आगामी उच्चस्तरीय बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ भारत की साझेदारी को गहरा करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।