नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना का एक चौंकाने वाला सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। वीडियो में पूरी इमारत कुछ ही सेकंड में अचानक ढहती दिखाई दे रही है। बिल्डिंग गिरते ही सड़क पर धूल और मलबे का विशाल गुबार फैल जाता है। आसपास मौजूद लोग जान बचाने के लिए भागते दिखाई देते हैं। हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जबकि मलबे से अब तक 11 लोगों को बचाए जाने की जानकारी सामने आई है।

घटना रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन इलाके में हुई। यहां लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट यानी पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के वक्त इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चलने की बात सामने आई है। अब हादसे की वजह और मरम्मत कार्य की भूमिका भी जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल हो सकती है।



सामने आए सीसीटीवी फुटेज में हादसे से ठीक पहले सड़क पर सामान्य गतिविधियां दिखाई देती हैं। लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त हैं। एक दुकानदार भी अपनी दुकान के बाहर बैठा दिखाई देता है। किसी को अंदाजा नहीं होता कि अगले कुछ ही पलों में सामने मौजूद पांच मंजिला इमारत जमींदोज होने वाली है।

कुछ सेकंड बाद अचानक पूरी बिल्डिंग गिरने लगती है। इमारत को ढहता देखकर सड़क और आसपास मौजूद लोग तेजी से भागते हैं। दुकान के बाहर बैठा दुकानदार भी तत्काल उठकर सुरक्षित स्थान की ओर दौड़ता दिखाई देता है। इसके तुरंत बाद पूरा इलाका धूल के गुबार में छिप जाता है। मलबा सड़क तक फैल जाता है और कुछ समय के लिए आसपास कुछ भी साफ दिखाई नहीं देता।

वीडियो सामने आने के बाद हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिस तेजी से पांच मंजिला इमारत गिरी, उससे वहां मौजूद लोगों को संभलने का बेहद कम समय मिला। सड़क पर मौजूद कुछ लोगों ने इमारत को गिरता देखकर भागकर अपनी जान बचाई।

इमारत के अंदर रहने वाले लोगों के लिए हालात और गंभीर थे। यह बिल्डिंग लड़कों के पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के समय कितने लोग इमारत के अंदर मौजूद थे, इसकी पूरी जानकारी राहत और बचाव अभियान तथा संबंधित रिकॉर्ड की जांच से स्पष्ट हो सकेगी।

हादसे के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इमारत का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल चुका था। अंदर मौजूद लोगों को निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। अब तक 11 लोगों को मलबे से बचाए जाने की जानकारी है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

वहीं हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। मौतों की संख्या बढ़ने से हादसे की गंभीरता और बढ़ गई है। पीजी में रहने वाले छात्रों और युवाओं के परिजनों के लिए भी घटना बेहद चिंताजनक रही। हादसे की खबर सामने आने के बाद पीजी में रहने वाले लोगों के परिवार अपने परिचितों की जानकारी लेने में जुट गए।

घटना के समय इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चलने की बात सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। यह जांच का विषय है कि वहां किस प्रकार का मरम्मत कार्य किया जा रहा था और इसके लिए जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे या नहीं। मरम्मत कार्य का इमारत की संरचनात्मक मजबूती पर कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं, इसका निष्कर्ष तकनीकी जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।

पांच मंजिला इमारत के इतनी तेजी से गिरने की वजह जानने के लिए विशेषज्ञ स्तर की जांच महत्वपूर्ण होगी। भवन की उम्र, निर्माण की गुणवत्ता, नक्शा, बाद में किए गए बदलाव और मरम्मत से जुड़े रिकॉर्ड जैसे पहलुओं की पड़ताल हादसे की असली वजह तक पहुंचने में मदद कर सकती है।

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी और किराए के कमरों में रहते हैं। ऐसे में इस घटना ने क्षेत्र में चल रहे पीजी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

छात्रों को किराए पर दिए जाने वाले भवनों की संरचनात्मक स्थिति, उनमें रहने वाले लोगों की संख्या और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हादसे के बाद आसपास की अन्य पुरानी या कमजोर इमारतों की जांच की मांग भी जोर पकड़ सकती है।

सीसीटीवी फुटेज जांच के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसमें इमारत के गिरने का समय और तरीका साफ दिखाई देता है। विशेषज्ञ वीडियो और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि इमारत का कौन सा हिस्सा पहले कमजोर पड़ा और उसके बाद पूरी संरचना किस तरह ढही।

हादसे के दौरान सड़क पर मौजूद लोगों का बाल-बाल बचना भी फुटेज में साफ नजर आता है। दुकान के बाहर बैठे व्यक्ति समेत कई लोगों ने खतरे को महसूस करते ही वहां से दौड़ लगा दी। यदि वे कुछ सेकंड भी देर करते तो सड़क तक आए मलबे की चपेट में आ सकते थे।

अब इस घटना की पूरी जांच पर नजर है। हादसे के लिए किसी स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी या भवन की संरचना पहले से कमजोर थी, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे मरम्मत कार्य की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।

सत्य निकेतन हादसे का सामने आया सीसीटीवी फुटेज उस भयावह दोपहर का प्रत्यक्ष दृश्य बन गया है। चंद सेकंड में पांच मंजिला इमारत का जमींदोज होना और लोगों का जान बचाकर भागना कैमरे में कैद है। छह लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह इमारत अचानक क्यों ढही और क्या इस हादसे को समय रहते रोका जा सकता था।

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