Delhi दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए कृषि संबंधी बजट 2026 के प्रस्तावों पर किसान संघ के नेताओं ने मिली-जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इससे पहले गरीब और युवा किसानों तथा "लखपति दीदियों" के कल्याण के लिए बजट में किए गए प्रावधानों का स्वागत किया था।
लखपति दीदी योजना 15 अगस्त, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी। यह उनकी सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे कम से कम 1 लाख रुपए की वार्षिक घरेलू आय अर्जित कर सकें।
चौहान ने आगे कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि ये प्रावधान विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। इनके माध्यम से हम गरीबी का उन्मूलन करेंगे, किसानों की आय बढ़ाएंगे और गांवों के विकास में सफल होंगे। इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध किसान संगठन भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने 500 अमृत सरोवरों के प्रावधान, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को मजबूत करने और पशुधन क्षेत्र में उद्यमिता को समर्थन देने को “अच्छी पहल” बताया।
तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए, बजट में जलाशयों के विकास और स्टार्टअप, महिला नेतृत्व वाले समूहों और मछली किसान उत्पादक संगठनों को शामिल करते हुए बाजार संपर्क स्थापित करने का प्रस्ताव है। पशुपालन में, बजट में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करने का प्रस्ताव है।
वहीं, बीकेएस के महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने आरोप लगाया कि बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और रसायनों के उपयोग को रोकने के लिए देश भर में फसलों में रसायनों के स्तर की जांच पर ध्यान नहीं दिया गया है। कुल मिलाकर, सरकार जो कहती है वह बजट में प्रतिबिंबित नहीं होता है।