नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न यानी SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 को लेकर चुनाव आयोग और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच विवाद तेज हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सोमवार को राहुल गांधी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए आरोपों को “गुमराह करने वाला” बताया। आयोग ने कहा कि बिहार में SIR के लिए 24 जून 2025 को जारी आदेश चुनाव आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर फॉर्म 6 में कथित रूप से “गैर-कानूनी और एकतरफा” बदलाव करने का आरोप लगाया। राहुल गांधी का दावा था कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने फॉर्म 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी।राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने इसे भ्रामक बताया। आयोग के मुताबिक, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए 24 जून 2025 को जो आदेश जारी किया गया था, उसे पूरे आयोग की सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में बरकरार रखा था।
फॉर्म 6 मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाला आवेदन पत्र है। कोई पात्र व्यक्ति पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए इस फॉर्म का इस्तेमाल करता है। SIR की प्रक्रिया के दौरान इसी फॉर्म के साथ जोड़े गए घोषणा-पत्र को लेकर मौजूदा विवाद सामने आया है।चुनाव आयोग ने अपने जवाब में 26 सितंबर को जारी प्रेस नोट का भी उल्लेख किया। आयोग ने कहा कि प्रेस नोट के पॉइंट 1(iii) में यह स्पष्ट किया गया था कि SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ लगाए गए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। आयोग का कहना है कि गैर-SIR अवधि में रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल जारी रहेगा।
विवाद की अहम बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार की सुनवाई के दौरान कहा कि उसने फॉर्म 6 में किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद अदालत यह देखना चाहेगी कि फॉर्म में बदलाव किसने किया।इसके बाद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति का हिस्सा साझा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में “गैर-कानूनी और एकतरफा” बदलाव किया। राहुल गांधी ने इसे मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के दुरुपयोग से भी जोड़ा। ये राहुल गांधी के आरोप हैं और मामले से जुड़े सवालों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि फॉर्म 6 को लेकर राहुल गांधी की ओर से पेश की जा रही व्याख्या सही नहीं है। आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, फॉर्म 6 को स्वयं नहीं बदला गया, बल्कि बिहार SIR के 24 जून 2025 के आदेश के जरिए उसके साथ एक घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। आयोग इसी अंतर को महत्वपूर्ण बताते हुए राहुल गांधी के दावे को भ्रामक बता रहा है।इस पूरे मामले में अब फॉर्म 6 और उसके साथ जोड़े गए घोषणा-पत्र के बीच का अंतर बहस के केंद्र में है। एक तरफ राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए सवाल उठा रहे हैं कि अगर अदालत ने फॉर्म 6 के संशोधन को मंजूरी नहीं दी तो बदलाव किस आधार पर किया गया। दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग का कहना है कि SIR के लिए घोषणा-पत्र जोड़ने वाला आदेश आयोग की सर्वसम्मति से लिया गया फैसला था और संबंधित SIR व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन प्राप्त था।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिकॉर्ड पेश किए जाने के बाद वह यह देखेगी कि संबंधित बदलाव किसने किया और उसकी प्रक्रिया क्या थी। इसलिए फिलहाल राहुल गांधी के आरोप और चुनाव आयोग का जवाब दोनों अलग-अलग पक्षों के दावे हैं।फॉर्म 6 का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम शामिल करने की प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में फॉर्म में किसी बदलाव, अतिरिक्त घोषणा या उससे जुड़ी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवाल चुनावी व्यवस्था से सीधे संबंधित हैं।
चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में इस बात पर जोर दिया है कि बिहार SIR से जुड़ा 24 जून 2025 का आदेश किसी एक अधिकारी का फैसला नहीं था, बल्कि आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद जारी हुआ था। वहीं राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।अब इस विवाद में आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट में रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के जवाब सामने आने के बाद और स्पष्ट होने की संभावना है। फिलहाल चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को “गुमराह करने वाला” करार देते हुए अपने पुराने आदेश और सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले का हवाला दिया है, जबकि राहुल गांधी फॉर्म 6 में बदलाव की प्रक्रिया और उसकी मंजूरी पर सवाल उठा रहे हैं।