New Delhi, नई दिल्ली : उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ( डीपीआईआईटी ) 2021, 2022, 2023 और 2024 में आयोजित विशेष अभियानों की तर्ज पर 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक स्वच्छता में सुधार और लंबित संदर्भों के निपटान के लिए विशेष अभियान 5.0 का आयोजन करेगा। इस वर्ष इसका उद्देश्य डीपीआईआईटी और इसके सभी संबद्ध/अधीनस्थ कार्यालयों/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/स्वायत्त संगठनों के कार्यालय परिसरों में स्वच्छता को पूर्णतः सुनिश्चित करना है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि विशेष अभियान 5.0 दो चरणों में आयोजित किया जाएगा तथा अभियान का प्रारंभिक चरण, 15 सितम्बर से 30 सितम्बर तक, पहले ही शुरू हो चुका है। पिछले वर्ष, विभाग ने विशेष अभियान 4.0 में सफलतापूर्वक भाग लिया और लंबित मामलों को कम करने में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए, जिससे कर्मचारियों के कार्य अनुभव में सुधार हुआ। विशेष अभियान 5.0 के लिए, डीपीआईआईटी ने देश भर में अपने संबद्ध, अधीनस्थ और स्वायत्त निकायों के क्षेत्रीय और शाखा कार्यालयों सहित 70 अभियान स्थलों की पहचान की है।
यह अभियान ई-कचरा निपटान, रिकॉर्ड प्रबंधन और स्थान उपयोग जैसी गतिविधियों पर केंद्रित होगा। ई-कचरे के प्रभावी और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा, जिससे कार्यालय स्थलों की स्वच्छता और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित होगा और साथ ही स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा मिलेगा। विशेष अभियान 4.0 के दौरान, स्वच्छता को संस्थागत बनाने और लंबित मामलों को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। कुल 58,545 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई और 15,816 फाइलों को हटाया गया। भौतिक फाइलों को हटाने और कबाड़ के निपटान के परिणामस्वरूप 15,847 वर्ग फुट खाली जगह मिली और 16,39,452 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
डीपीआईआईटी ने सभी जन शिकायतों, व्यक्तिगत शिकायतों (पीजी) की अपीलों का समाधान करके और नियमों को सरल बनाकर लंबित मामलों के निपटान के अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया। विभाग ने देश भर में 70 स्थानों पर 300 स्वच्छता अभियान भी चलाए। अभियान का मुख्य उद्देश्य, स्थान प्रबंधन, अप्रयुक्त वस्तुओं को हटाकर और उपलब्ध स्थान को मनोरंजन कक्ष और जिम में परिवर्तित करके प्रभावी ढंग से लागू किया गया। डीपीआईआईटी के अंतर्गत आने वाले संगठनों ने भी अभिनव कदम उठाए: आंध्र प्रदेश और हरियाणा में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थानों ने अपशिष्ट पदार्थों का रचनात्मक ढंग से पुनः उपयोग करने के लिए "अपशिष्ट से कला" पहल शुरू की, जबकि राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन निर्माण सामग्री परिषद, बल्लभगढ़ ने नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने के लिए 450 किलोवाट घंटा क्षमता की सौर छत प्रणाली स्थापित की। इसके अलावा, केंद्रीय लुगदी एवं कागज अनुसंधान संस्थान ने स्थानीय स्कूल के विद्यार्थियों को कृषि अपशिष्ट से बनी नोटबुक और अनावश्यक कबाड़ से बनी टेबल वितरित कीं, तथा उन्हें टिकाऊ प्रथाओं और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बारे में जागरूक किया।