दीवाली पर दिल्ली का वायु प्रदूषण बढ़ा, अधिकांश AQI मॉनिटरिंग स्टेशन ‘रेड जोन’ में
New Delhi. नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सोमवार रात को दीवाली की रात के अवसर पर लोग आतिशबाजी और पटाखों के साथ त्योहार मना रहे थे, लेकिन इसके चलते शहर की वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट देखने को मिली। दिल्ली में अधिकांश AQI (Air Quality Index) मॉनिटरिंग स्टेशन ‘रेड जोन’ में दर्ज किए गए, जो कि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्थिति को दर्शाता है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, पटाखों के जले जाने से PM2.5 और PM10 कणों का स्तर काफी बढ़ गया, जिससे सांस लेने में समस्या और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि वायु प्रदूषण का यह स्तर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है।
सेंसर और मॉनिटरिंग उपकरणों ने यह संकेत दिया कि दिल्ली के सिविल लाइंस, आईटीओ, आनंद विहार, वसंत विहार और शाहदरा जैसे मुख्य इलाकों में AQI ‘रेड जोन’ तक पहुँच गया। इसका मतलब है कि हवा में प्रदूषण की मात्रा इतनी अधिक है कि यह सभी लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी जाती है।
आतिशबाजी और प्रदूषण का सीधा संबंध
विशेषज्ञों का कहना है कि दीवाली पर आतिशबाजी से निकली धुआं, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और भारी धूल कण वायु में मिलकर प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ाते हैं। पटाखों के साथ उत्सव का आनंद लेने के दौरान लोग अक्सर मास्क का उपयोग नहीं करते, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
सरकार और प्रशासन की चेतावनी
दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को पहले ही चेतावनी दी थी कि दीवाली के दिन बाहर निकलने वाले धुएँ और धूल कणों से बचने के लिए मास्क पहनें, बच्चों और बुजुर्गों को घर में सुरक्षित रखें और लंबी अवधि के लिए प्रदूषण वाले क्षेत्रों में न जाएं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि ऑनलाइन एयर क्वालिटी ऐप्स और AQI वेबसाइट्स के जरिए हर नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए समय-समय पर वायु गुणवत्ता की जानकारी देख सकता है।
स्वास्थ्य प्रभाव और नागरिकों की प्रतिक्रिया
मौसम विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कुछ नागरिकों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि पटाखों और आतिशबाजी की वजह से शाम से ही धुंध और गंध फैल गई थी, जिससे सांस लेने में कठिनाई हुई।
AQI स्तर और आंकड़े
राजधानी के अधिकांश मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI का स्तर 300 से ऊपर दर्ज किया गया, जो ‘रेड जोन’ के दायरे में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 300 से ऊपर का AQI स्तर खतरनाक श्रेणी माना जाता है और सभी लोगों को स्वास्थ्य संबंधी खतरे के प्रति सजग रहने की आवश्यकता होती है।
दीवाली और प्रदूषण पर सामाजिक चेतावनी
हालांकि दीवाली पर आतिशबाजी का उत्सव हर साल लोगों के लिए आनंददायक होता है, लेकिन इसके पर्यावरणीय और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एनजीओ और पर्यावरण संगठनों ने नागरिकों से अपील की है कि ग्रीन पटाखों का उपयोग करें, या प्रदूषण रहित विकल्प अपनाएं, ताकि त्योहार का आनंद स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना मनाया जा सके।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि इस तरह के प्रदूषण नियंत्रण उपायों को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले वर्षों में दीवाली पर वायु गुणवत्ता और भी गंभीर रूप ले सकती है।