नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए हाई अलर्ट पर है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं के संभावित आगमन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा तैयार किया गया है। करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों को एयरपोर्ट, विदेशी मेहमानों के होटल, उनके आवागमन वाले रास्तों और मुख्य आयोजन स्थल भारत मंडपम की सुरक्षा में लगाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति के तहत प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों को अलग-अलग होटलों और सुरक्षा जोन में रखा जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के 11 सितंबर को भारत पहुंचने की उम्मीद है, जबकि चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के 12 सितंबर को पहुंचने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं के पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतरने और वहां से कड़ी सुरक्षा के बीच चाणक्यपुरी क्षेत्र स्थित होटलों तक पहुंचने की तैयारी है।
पुतिन जिनपिंग और पेजेशकियन के लिए अलग इंतजाम
सुरक्षा कारणों से अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों के लिए होटल आवंटित किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक पुतिन के ITC Maurya और जिनपिंग के Taj Palace में ठहरने की संभावना है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को अन्य प्रमुख नेताओं से अलग होटल में ठहराने की व्यवस्था की गई है। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए Taj Mansingh, Taj Palace, ITC Maurya, Leela Palace और The Oberoi जैसे प्रमुख होटलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी है कि कुछ होटलों में राष्ट्राध्यक्षों और उनके प्रतिनिधिमंडलों के लिए कई मंजिलों तक नियंत्रित किए जाने की तैयारी है। आम लोगों की आवाजाही सीमित रखने के साथ होटल कर्मचारियों की भी गहन जांच की गई है।
पुलिस ने होटल के कर्मचारियों का दिल्ली में ही नहीं बल्कि उनके गृह राज्यों में भी सत्यापन कराया है। इसका मकसद किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे को पहले ही खत्म करना है।
चीन और रूस की सुरक्षा टीमें पहले ही पहुंचीं
रूस और चीन की अपनी सुरक्षा टीमें उन होटलों में पहले ही पहुंच चुकी हैं, जहां उनके राष्ट्राध्यक्षों के ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। ये टीमें भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा कर रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी सुरक्षा टीमों के पास अत्याधुनिक हथियार और सुरक्षा उपकरण भी हैं। राष्ट्राध्यक्ष जिस मंजिल पर ठहरेंगे, वहां से लेकर होटल की छत और ग्राउंड फ्लोर तक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पुतिन के संभावित होटल में अतिरिक्त DCP और दो ACP को अलग-अलग शिफ्ट में तैनात करने की व्यवस्था की गई है।
30 हजार जवान संभालेंगे दिल्ली की सुरक्षा
BRICS सम्मेलन के दौरान दिल्ली में लगभग 30 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए जा रहे हैं। इनमें करीब आधे दिल्ली पुलिस से और बाकी अर्धसैनिक बलों समेत दूसरी सुरक्षा इकाइयों से जुड़े बताए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को कई सेक्टरों में बांटा गया है और प्रत्येक सेक्टर की जिम्मेदारी DCP या अतिरिक्त DCP स्तर के अधिकारी को दी गई है।
सुरक्षा केवल भारत मंडपम तक सीमित नहीं रहेगी। पालम एयरफोर्स स्टेशन और एयरपोर्ट से लेकर होटल तथा सम्मेलन स्थल तक पूरा वीवीआईपी रूट सुरक्षा घेरे में रहेगा।
इसके साथ ही ड्रोन और दूसरे रिमोट कंट्रोल फ्लाइंग ऑब्जेक्ट से पैदा होने वाले संभावित खतरों को भी सुरक्षा योजना में शामिल किया गया है।
अपनी गाड़ियां लेकर आएंगे पुतिन और जिनपिंग
रूस और चीन के राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा में उनके अपने सुरक्षा संसाधन भी शामिल होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं के कुछ विशेष वाहन और काफिले की गाड़ियां विमान से भारत लाई जा सकती हैं।
पुतिन की सुरक्षा को विशेष रूप से बेहद मजबूत माना जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक उनके जमीनी सफर के लिए रूस की बख्तरबंद Aurus Senat कार इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है। रूसी सुरक्षा एजेंसियां भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर उनके लिए बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार कर रही हैं।
होटल से भारत मंडपम तक सुरक्षा कॉरिडोर
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के होटल से भारत मंडपम तक पहुंचने वाले रास्तों को भी सुरक्षा योजना में शामिल किया गया है। ट्रैफिक पुलिस वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान कई मार्गों पर यातायात नियंत्रित करेगी।
अलग-अलग राष्ट्राध्यक्षों के काफिले एक ही समय पर आमने-सामने न आएं और निर्धारित समय पर भारत मंडपम पहुंचें, इसके लिए विस्तृत रूट प्लान तैयार किया गया है। कई मार्गों पर सुरक्षा एजेंसियां पहले ही रिहर्सल कर चुकी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 12 सितंबर को विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के दोपहर करीब 1:30 बजे से 2:15 बजे के बीच भारत मंडपम पहुंचने की योजना है। 13 सितंबर को सुबह लगभग 8:50 से 9:25 बजे के बीच नेताओं के सम्मेलन स्थल पहुंचने की संभावना है।
सबसे बड़े काफिलों में रूस और चीन
BRICS सम्मेलन के दौरान रूस और चीन के प्रतिनिधिमंडलों के काफिले सबसे बड़े काफिलों में शामिल रहने की उम्मीद है। इसी कारण दोनों देशों के नेताओं के लिए सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
रूसी राष्ट्रपति के काफिले के पहुंचने से पहले मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा। इसी तरह चीनी राष्ट्रपति के आवागमन के दौरान भी विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू रहेगा।
राष्ट्राध्यक्षों की यात्रा के दौरान कुछ समय के लिए सामान्य ट्रैफिक रोका जा सकता है। इससे दिल्ली के कुछ इलाकों में लोगों को यातायात संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
11 देशों के नेता और 10 पार्टनर देशों के प्रतिनिधि
इस बार BRICS सम्मेलन का आकार भी काफी बड़ा है। दिल्ली में 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों से राष्ट्राध्यक्षों तथा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के आने की तैयारी है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भागीदारी की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भागीदारी को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुतिन और पेजेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठकों की भी पुष्टि की गई है।
जिनपिंग की यात्रा पर दुनिया की नजर
जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। भारत और चीन के बीच 2020 के सीमा संघर्ष के बाद संबंधों में आए तनाव और हाल के वर्षों में शुरू हुई कूटनीतिक नरमी के बीच उनकी यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है।
BRICS के मंच पर वैश्विक राजनीति के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच ईरान की मौजूदगी सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।
अभेद्य किले में तब्दील हो रही दिल्ली
BRICS सम्मेलन के चलते दिल्ली में सुरक्षा जमीन से लेकर आसमान तक मजबूत की जा रही है। होटल अलग-अलग सिक्योरिटी जोन में बांटे जा रहे हैं और प्रमुख होटलों में कमांड पोस्ट तक बनाए जाने की रिपोर्ट है।
इस पूरे सुरक्षा ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बल और विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। एयरपोर्ट से लेकर होटल और भारत मंडपम तक हर महत्वपूर्ण स्थान पर बहुस्तरीय निगरानी की तैयारी है।
करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बताती है कि BRICS सम्मेलन दिल्ली के लिए केवल एक बड़ा कूटनीतिक आयोजन ही नहीं बल्कि विशाल सुरक्षा ऑपरेशन भी है। पुतिन, जिनपिंग और पेजेशकियन जैसे शीर्ष नेताओं की मौजूदगी के बीच अगले कुछ दिन राजधानी के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।