Delhi दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) के ग्रेजुएट होने वाले छात्रों से अपील की कि वे भारत की जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से मजबूती से जुड़े रहते हुए वैश्विक नज़रिए को अपनाएं। उन्होंने कहा कि फैशन टेक्नोलॉजी देश की वैश्विक पहचान बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
नई दिल्ली में NIFT के 18 परिसरों के संयुक्त दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का साधन भी है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कारीगरों को अधिक समर्थन और मार्गदर्शन की आवश्यकता है ताकि युवा पीढ़ी गर्व और आत्मविश्वास के साथ इस पेशे को आगे बढ़ा सके। मुर्मू ने NIFT की 'क्राफ्ट क्लस्टर पहल' जैसी पहलों का स्वागत किया, जिसके तहत कारीगरों और बुनकरों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है और बाज़ारों से जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्रपति ने फैशन और टेक्सटाइल उद्योग के विकास में सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) को केंद्र में रखने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों से विश्व-स्तरीय उत्पाद और ब्रांड बनाने का आग्रह किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि वे पर्यावरण के अनुकूल हों।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल के उपयोग पर ज़ोर देते हुए मुर्मू ने कहा कि टेक्सटाइल के बचे हुए टुकड़ों को केवल कचरा समझकर नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि उन्हें नई उपयोगिता और मूल्य बनाने के लिए बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि NIFT की रणनीतिक योजना में सस्टेनेबिलिटी और सामाजिक ज़िम्मेदारी को महत्व दिया गया है और विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) के तौर-तरीकों को और बढ़ावा देगा।
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