नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार, नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) और दिल्ली वक्फ बोर्ड से जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि कृषि भवन क्षेत्र में चल रहे पुनर्विकास कार्यों के बावजूद मस्जिद में नमाज पढ़ने की सुविधा जारी रखी जाए। मामले की सुनवाई जस्टिस अनीश दयाल की पीठ के समक्ष हुई।कोर्ट ने 17 सितंबर को जारी अपने आदेश में कदीमी मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति की ओर से दायर याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत ने केंद्र सरकार, NDMC और दिल्ली वक्फ बोर्ड को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब या स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।याचिका में मस्जिद में नमाज की सुविधा बनाए रखने का अनुरोध किया गया है। यह मामला ऐसे समय अदालत के सामने आया है जब कृषि भवन और आसपास के सरकारी भवनों के पुनर्विकास से जुड़े कार्य चल रहे हैं। याचिकाकर्ता समिति ने पुनर्विकास के बीच धार्मिक स्थल से जुड़ी व्यवस्था और नमाज पढ़ने की सुविधा को लेकर अदालत का रुख किया है।
पुनर्विकास कार्य रोकने की मांग नहीं
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने सुनवाई के दौरान अदालत के सामने याचिका की मांग को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास कार्य को रोकने की मांग नहीं कर रहे हैं।अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत प्रस्तावित कॉमन सेक्रेटेरिएट भवनों के निर्माण कार्य में बाधा डालना नहीं है। याचिका का केंद्र मस्जिद में नमाज पढ़ने की सुविधा को बनाए रखने से संबंधित है।इस स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने मामले से जुड़े संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह में जवाब या स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। अदालत ने फिलहाल मामले में अंतिम फैसला नहीं दिया है। अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब और स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
क्या है मामला
कृषि भवन नई दिल्ली के महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय परिसरों में शामिल है। इसके आसपास शास्त्री भवन सहित कई केंद्रीय सरकारी इमारतें मौजूद हैं। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र के पुनर्विकास के तहत इन क्षेत्रों में सरकारी कार्यालयों और संबंधित बुनियादी ढांचे को नए सिरे से विकसित करने की योजनाएं चल रही हैं।इसी क्षेत्र में मौजूद कदीमी मस्जिद को लेकर देखरेख करने वाली समिति ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। समिति की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया है कि पुनर्विकास गतिविधियों के बीच मस्जिद में नमाज अदा करने की सुविधा प्रभावित न हो।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों में हस्तक्षेप करना नहीं है। वे चाहते हैं कि पुनर्विकास परियोजनाओं के साथ-साथ मस्जिद से संबंधित धार्मिक गतिविधियों के लिए भी व्यवस्था बनी रहे।
केंद्र और NDMC से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार और NDMC के साथ दिल्ली वक्फ बोर्ड को भी पक्षकार बनाते हुए जवाब मांगा है। इन सभी पक्षों को चार सप्ताह की समयसीमा के भीतर अपना जवाब अथवा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।अदालत के निर्देश के बाद अब संबंधित पक्षों की ओर से यह बताया जाना है कि कदीमी मस्जिद की मौजूदा स्थिति क्या है और पुनर्विकास परियोजना के दौरान वहां नमाज पढ़ने की सुविधा को लेकर क्या व्यवस्था है। मामले की अगली सुनवाई में इन जवाबों पर विचार किया जाएगा।
कदीमी मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति की याचिका
यह याचिका कदीमी मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति की ओर से दाखिल की गई है। समिति ने अदालत के समक्ष मस्जिद में नमाज की सुविधा जारी रखने से संबंधित अपनी मांग रखी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अदालत में पक्ष रखा।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि वे क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का विरोध नहीं कर रहे हैं। विशेष रूप से कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास तथा कॉमन सेक्रेटेरिएट भवनों के निर्माण को रोकने की कोई मांग नहीं की गई है।इससे मामले का मुख्य मुद्दा मस्जिद में धार्मिक गतिविधियों के संचालन और पुनर्विकास कार्यों के बीच व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित दिखाई देता है।
2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी। उस दौरान केंद्र सरकार, NDMC और दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल जवाब या स्टेटस रिपोर्ट अदालत के सामने होगी।अदालत आगे की कार्यवाही इन जवाबों और मामले से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर करेगी। फिलहाल हाई कोर्ट की ओर से केवल नोटिस जारी किया गया है और मामले पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।कदीमी मस्जिद से जुड़ी यह याचिका राजधानी के एक महत्वपूर्ण पुनर्विकास क्षेत्र में धार्मिक सुविधा और विकास कार्यों के बीच व्यवस्था से संबंधित है। अब मामले में संबंधित सरकारी संस्थाओं और वक्फ बोर्ड के जवाब के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।