नई दिल्ली : 29 अक्टूबर 2026। नर्मदा नदी पर बनी सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े दशकों पुराने वित्तीय विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान ने परियोजना के निर्माण खर्च, पुनर्वास और अन्य लंबित वित्तीय देनदारियों के एकमुश्त निपटान को औपचारिक मंजूरी दे दी है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति की 15वीं बैठक में चारों राज्यों के बीच पहले से हुए समझौते को स्वीकार करते हुए बकाया भुगतान की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया। इस फैसले से राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय विवाद के समाधान का रास्ता साफ हुआ है।
नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की 15वीं बैठक में बड़ा फैसला
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति की 15वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया।गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल बैठक में मौजूद रहे, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।इस दौरान सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े पुराने वित्तीय दावों, भुगतान संबंधी विवादों और राज्यों के बीच लागत के बंटवारे पर चर्चा हुई।बैठक में भारत के महान्यायवादी की कानूनी राय और चारों राज्यों के बीच 7 जुलाई 2026 को हुए समझौते को स्वीकार किया गया।
7 जुलाई को अमित शाह की मौजूदगी में हुआ था समझौता
सरदार सरोवर परियोजना से जुड़ा यह विवाद कई दशकों से चला आ रहा था। इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार ने चारों राज्यों के साथ बातचीत की पहल की थी।7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।इस समझौते का उद्देश्य निर्माण लागत के बंटवारे, पुनर्वास संबंधी खर्चों और लंबित भुगतान दावों को आपसी सहमति से सुलझाना था।अब समीक्षा समिति ने उस समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता स्पष्ट हो गया है।
लगभग 7,975 करोड़ रुपये के विवाद का समाधान
रिपोर्टों के अनुसार, सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े निर्माण खर्च, पुनर्वास और भूमि मुआवजे के मद में लगभग 7,974.86 करोड़ रुपये के वित्तीय विवाद लंबे समय से लंबित थे।विभिन्न राज्यों के बीच इस बात पर मतभेद थे कि परियोजना के निर्माण और प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर होने वाले खर्च का कितना हिस्सा किस राज्य को वहन करना चाहिए।नए समझौते के तहत इन वित्तीय दायित्वों का पुनर्निर्धारण किया गया है।इस व्यवस्था से संबंधित राज्यों को अपने पुराने दावों और देनदारियों का निपटारा करने में मदद मिलेगी।हालांकि, विवादित कुल राशि और वास्तविक नकद भुगतान को एक समान नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि समझौते में पुराने दावों का समायोजन भी शामिल है।
गुजरात उठाएगा परियोजना की लागत का बड़ा हिस्सा
नए समझौते के अनुसार, पुनर्वास से संबंधित वित्तीय दायित्वों के बंटवारे में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।रिपोर्टों के मुताबिक, गुजरात की हिस्सेदारी लगभग 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दी गई है।मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत से घटाकर 16.17 प्रतिशत निर्धारित की गई है।इसी तरह महाराष्ट्र की हिस्सेदारी घटाकर 7.76 प्रतिशत और राजस्थान की हिस्सेदारी लगभग 1.17 प्रतिशत की गई है।इस बदलाव के माध्यम से राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे लागत साझा करने के विवाद को समाप्त करने का प्रयास किया गया है।समझौते के तहत मध्य प्रदेश के कुछ पुराने वित्तीय दावों का भी समाधान किया गया है।
मध्य प्रदेश को मिलेगी वित्तीय राहत
सरदार सरोवर परियोजना के पुराने विवाद के समाधान से मध्य प्रदेश को भी महत्वपूर्ण वित्तीय राहत मिलने की बात सामने आई है।जुलाई में हुए समझौते के बाद प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मध्य प्रदेश को गुजरात को लगभग 217 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।इससे पहले राज्य की देनदारियों को लेकर कहीं अधिक राशि का विवाद था।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समझौते को लंबे समय से लंबित समस्या का समाधान बताया था।हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में कुछ भुगतान मदों की राशि अलग बताई गई है। इसलिए अंतिम राज्यवार भुगतान के लिए अधिकृत वित्तीय विवरण महत्वपूर्ण होगा।
वित्त वर्ष 2026-27 में पूरा होगा बकाया भुगतान
नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति ने बकाया राशि का भुगतान चालू वित्त वर्ष 2026-27 के भीतर पूरा करने की व्यवस्था को मंजूरी दी है।केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को समझौते पर सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्यों के बीच नदी जल और उससे जुड़े विवादों को बातचीत तथा आपसी सहमति से सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं।पाटिल ने समझौते की प्रक्रिया में योगदान देने वाले अधिकारियों और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की भी सराहना की।केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इस तरह के फैसले राज्यों के बीच समन्वय और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।
सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा नदी पर स्थित देश की प्रमुख बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं में शामिल है।यह सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।परियोजना के माध्यम से गुजरात और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने में सहायता मिली है।इसके अलावा जलविद्युत उत्पादन से संबंधित लाभ भी परियोजना में भागीदार राज्यों को प्राप्त होते हैं।नर्मदा नदी से जुड़े जल संसाधनों का उपयोग कृषि और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।विशेष रूप से पानी की कमी वाले इलाकों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों की उत्पादकता और आजीविका के लिए उपयोगी माना जाता है।
केंद्र ने बताया सहकारी संघवाद का उदाहरण
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई में हुए समझौते को राज्यों के बीच सहमति से विवाद सुलझाने का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया था।उन्होंने कहा था कि पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जनता और किसानों के हित में होना चाहिए।केंद्र सरकार इस तरह के समझौतों को सहकारी संघवाद की दिशा में सकारात्मक कदम मान रही है।हालांकि, समझौते की वास्तविक सफलता निर्धारित समयसीमा में बकाया भुगतान और सभी सहमत शर्तों के अनुपालन पर निर्भर करेगी।
चार राज्यों के बीच सहयोग का नया रास्ता
सरदार सरोवर परियोजना से जुड़ा वित्तीय विवाद लंबे समय तक राज्यों के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहा।अब चारों राज्यों की सहमति से पुराने दावों और देनदारियों के निपटान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।इस फैसले से परियोजना के वित्तीय प्रबंधन में स्पष्टता आने और संबंधित राज्यों के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की 15वीं बैठक में एकमुश्त निपटान को मिली मंजूरी चारों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण कदम है। अब वित्त वर्ष 2026-27 के भीतर भुगतान पूरा करने और समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने पर नजर रहेगी।
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