CBSE रीवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक का शक

Update: 2026-05-30 04:59 GMT

Delhi दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के रीवैल्यूएशन पोर्टल से जुड़ा एक गंभीर तकनीकी और सुरक्षा मामला सामने आया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पोर्टल के पेमेंट सिस्टम पर “गलत इरादे से साइबर अटैक” किए जाने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते लगभग 50 छात्रों को बिना अनुमति के सिस्टम तक पहुंच मिल गई।

सूत्रों ने बताया कि यह समस्या उस समय सामने आई जब पोर्टल पर फीस भुगतान प्रक्रिया के दौरान असामान्य गतिविधियां दर्ज की गईं। यह पेमेंट गेटवे HDFC बैंक से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी या साइबर छेड़छाड़ के कारण कुछ छात्रों के अकाउंट में गलत तरीके से एक्सेस मिला।

सूत्रों का कहना है कि करीब 50 छात्रों के मामलों में यह अनधिकृत पहुंच देखी गई, जिससे पोर्टल पर फीस की राशि में असामान्य बदलाव दिखने लगे। कुछ मामलों में रीवैल्यूएशन फीस बेहद कम, लगभग 1 रुपये दिखाई गई, जबकि कुछ मामलों में यह राशि अचानक बढ़कर 67,000 से 68,000 रुपये तक पहुंच गई।

एक अधिकारी ने बताया कि यह स्थिति सामान्य तकनीकी त्रुटि से अधिक गंभीर प्रतीत होती है, क्योंकि फीस डिस्प्ले में इस तरह का अचानक और बड़ा बदलाव सिस्टम में किसी बाहरी हस्तक्षेप या गलत उपयोग की ओर इशारा करता है। हालांकि अभी इसकी जांच चल रही है और अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ छात्रों ने या तो मजाक में या गलत इरादे से सिस्टम में बदलाव देखने की कोशिश की, जिसके चलते यह गड़बड़ी और अधिक स्पष्ट हो गई। लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे तकनीकी खामी के साथ-साथ संभावित साइबर अटैक की भी जांच जरूरी है।

घटना सामने आने के बाद संबंधित पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है। CBSE और तकनीकी टीम यह जांच कर रही है कि सिस्टम में किस स्तर पर चूक हुई और क्या पेमेंट गेटवे या पोर्टल की सुरक्षा को बायपास किया गया था।

इस घटना के बाद शिक्षा और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि यदि इस तरह की अनधिकृत पहुंच को समय रहते रोका नहीं गया तो छात्रों के डेटा और वित्तीय जानकारी के साथ छेड़छाड़ का खतरा बढ़ सकता है।

फिलहाल CBSE की ओर से इस मामले में विस्तृत तकनीकी जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह पूरी तरह सिस्टम की तकनीकी गलती थी या किसी संगठित साइबर हमले का हिस्सा था। अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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