Delhi कनॉट प्लेस के एक रेस्तरां मालिक ने वाणिज्यिक केंद्र में अनधिकृत विरोध प्रदर्शन और सभाओं को रोकने और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा कथित तौर पर 10 अक्टूबर को आयोजित आंदोलन के कारण हुए व्यावसायिक नुकसान के लिए मुआवजे की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। अधिवक्ता उमंग त्यागी ने शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे के समक्ष कनॉट प्लेस के एक रेस्तरां के पार्टनर आयुष चोपड़ा द्वारा दायर याचिका का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि उसने इसी तरह की याचिकाओं पर गुरुवार को एक आदेश पारित किया था और संकेत दिया था कि मामले की सुनवाई 27 अक्टूबर को की जाएगी।
याचिकाकर्ता ने 10 अक्टूबर के आंदोलन के दौरान व्यापारियों को हुए नुकसान का आकलन करने और जिम्मेदार लोगों से मुआवजे की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है कि विरोध प्रदर्शन केवल निर्दिष्ट स्थानों पर और निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित किए जाएं। यह याचिका 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में लोगों को इकट्ठा होने के सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के आह्वान पर विवाद के बीच आई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सेंट्रल पार्क एक निर्दिष्ट विरोध स्थल नहीं है और ऐसी सभाएं व्यावसायिक गतिविधि को बाधित कर सकती हैं, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान।
याचिका के अनुसार, अनुमति नहीं मिलने के बावजूद 10 अक्टूबर को हुए आंदोलन के कारण कनॉट प्लेस में दुकानें बंद हो गईं और दिल्ली के कई बाजारों में कारोबार बाधित हुआ। व्यापारियों के संगठनों के अनुमान का हवाला देते हुए, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कनॉट प्लेस में व्यवसायों को उस दिन 150 करोड़ रुपये से 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि राजधानी भर में लगभग 2,000 करोड़ रुपये की व्यावसायिक गतिविधि प्रभावित हुई। याचिकाकर्ता ने आगे दावा किया कि व्यवधानों के कारण उनके रेस्तरां के व्यवसाय में भारी गिरावट आई, जिसमें नवरात्रि भी शामिल थी।
यह तर्क देते हुए कि विरोध करने का अधिकार व्यापारियों के अपने व्यवसाय को जारी रखने के मौलिक अधिकार के खिलाफ संतुलित होना चाहिए, याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रदर्शन किसी भी स्थान पर अपनी इच्छानुसार आयोजित नहीं किया जा सकता है और इसे निर्दिष्ट स्थलों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। भारत संघ, दिल्ली पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली सरकार को प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया है। यह याचिका सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित सीजेपी सभा को लेकर उच्च न्यायालय के समक्ष चल रही कार्यवाही के बीच आई है। गुरुवार को, अदालत ने दिल्ली पुलिस से एक आश्वासन दर्ज किया कि दीपके की गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए कानून के तहत सभी संभव उपाय किए जाएंगे।
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