नई दिल्ली। भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत बनाने की दिशा में ब्रह्मोस एयरोस्पेस एक महत्वपूर्ण परियोजना पर काम कर रही है। कंपनी अपनी अगली पीढ़ी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस-एनजी' (BrahMos-NG) का पहला प्रोटोटाइप वर्ष 2027 या 2028 तक तैयार करने की उम्मीद कर रही है। इसके साथ ही कंपनी भविष्य में 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली मिसाइल विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। हालांकि लंबी दूरी वाली यह मिसाइल अभी अवधारणा के स्तर पर है।ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक डॉ. जयतीर्थ जोशी ने गुरुवार को एक साक्षात्कार में कंपनी की भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल अभी विकास के चरण में है और इसके निर्माण में अधिक स्वदेशी उपकरणों, आधुनिक तकनीकों तथा उन्नत सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा।
2027 या 2028 तक तैयार होगा पहला प्रोटोटाइप
डॉ. जयतीर्थ जोशी ने बताया कि कंपनी ने अगली पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली के विकास के लिए विस्तृत योजना तैयार कर ली है। वैज्ञानिक और इंजीनियर लगातार इस परियोजना पर काम कर रहे हैंउन्होंने कहा कि नई मिसाइल में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर अनुसंधान और विकास कार्य की आवश्यकता है।डॉ. जोशी के अनुसार, कंपनी का लक्ष्य 2027 या 2028 तक पहला प्रोटोटाइप तैयार करना है। हालांकि इसकी समयसीमा अनुसंधान, तकनीकी विकास और परीक्षण की प्रगति पर निर्भर करेगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल मिसाइल का विकास जारी है। प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद उसकी क्षमताओं और अन्य तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की और छोटी होगी नई मिसाइल
ब्रह्मोस-एनजी को मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल की तुलना में अधिक हल्का और आकार में छोटा बनाने की योजना है। इसका उद्देश्य सुपरसोनिक गति और सटीक मारक क्षमता को बनाए रखते हुए ऐसी मिसाइल तैयार करना है, जिसे विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्म पर आसानी से तैनात किया जा सके।नई मिसाइल में उन्नत कंपोजिट सामग्री का उपयोग किए जाने की संभावना है। इससे उसका वजन कम करने और प्रदर्शन बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, छोटी और हल्की मिसाइल विकसित होने से लड़ाकू विमानों की हथियार ले जाने की क्षमता बढ़ सकती है। ब्रह्मोस-एनजी को सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे विमानों के साथ इस्तेमाल करने की योजना भी है। हालांकि इसकी वास्तविक क्षमताओं की पुष्टि परीक्षणों के बाद ही हो सकेगी।
1,500 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल की भी योजना
ब्रह्मोस एयरोस्पेस भविष्य में अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइल प्रणाली पर भी विचार कर रही है। कंपनी के रोडमैप में लगभग 1,500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइल की अवधारणा शामिल है।हालांकि डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि लंबी दूरी वाली मिसाइल अभी शुरुआती वैचारिक चरण में है। इसके डिजाइन, तकनीकी विशेषताओं और विकास की समयसीमा को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।इसलिए 1,500 किलोमीटर वाली प्रस्तावित मिसाइल को ब्रह्मोस-एनजी की घोषित मारक क्षमता नहीं माना जाना चाहिए। दोनों अलग विकास योजनाएं हैं।
स्वदेशी तकनीक पर रहेगा विशेष जोर
नई ब्रह्मोस मिसाइल के विकास में स्वदेशीकरण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। कंपनी का उद्देश्य मिसाइल प्रणाली में भारतीय तकनीकों और देश में निर्मित उपकरणों की हिस्सेदारी बढ़ाना है।इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय अनुसंधान संस्थानों, रक्षा उद्योगों और तकनीकी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम है। यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के सहयोग से स्थापित किया गया था।
भारतीय सशस्त्र बलों को मिल सकती है नई क्षमता
ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली पहले से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना का हिस्सा है। इसके नए संस्करणों पर काम देश की लंबी अवधि की रक्षा आधुनिकीकरण योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।ब्रह्मोस-एनजी के विकसित होने से भारतीय सशस्त्र बलों को अपेक्षाकृत हल्के प्लेटफॉर्म से सुपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल करने की अतिरिक्त क्षमता मिल सकती है।हालांकि प्रोटोटाइप तैयार होना और मिसाइल का सेना में शामिल होना अलग-अलग चरण हैं। इसके लिए जमीनी परीक्षण, उड़ान परीक्षण और संबंधित सैन्य प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण जरूरी होगा।कंपनी की मौजूदा योजना के अनुसार, आने वाले वर्षों में ब्रह्मोस-एनजी परियोजना की प्रगति भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।