क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुआवजे के दावेदारों की परिभाषा को संकीर्ण दायरे में नहीं रखा जा सकता। जो भी व्यक्ति मृतक की कमाई पर निर्भर था, उसे मुआवजा पाने से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ कानूनी उत्तराधिकारी होने का मतलब यह नहीं कि अन्य आर्थिक रूप से आश्रित लोग मुआवजा नहीं मांग सकते।
इस फैसले का असर:
- सड़क हादसों में जान गंवाने वालों के परिवारों को अधिक न्याय मिलेगा।
- बीमा कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी।
- गरीब और वंचित परिवारों को भी मुआवजे का लाभ मिलेगा।
- केवल कानूनी उत्तराधिकारी ही नहीं, बल्कि मृतक के पालन-पोषण पर निर्भर अन्य सदस्य भी दावेदार बन सकेंगे।
अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे के मामलों में बीमा कंपनियां कानूनी दांव-पेंच का सहारा लेकर आश्रितों को उनका हक देने से बचती रही हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अब तक मुआवजे से वंचित रह जाते थे।
अब देखना यह होगा कि इस फैसले के बाद बीमा कंपनियों और न्यायपालिका के स्तर पर क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।