नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए भीषण आतंकी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने दुनिया भर में अनगिनत लोगों की जान ली है और इससे अनेक परिवारों एवं समाजों को गहरा दुख पहुंचा है। प्रधानमंत्री ने सीमा पार आतंकवाद के पीड़ित के रूप में भारत के लंबे अनुभव का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों के खिलाफ देश के अडिग संकल्प को दोहराया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी संदेश में 9/11 के हमलों में जान गंवाने वाले लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि आतंकी खतरे का स्वरूप समय के साथ लगातार बदल रहा है, लेकिन इसके खिलाफ भारत का विरोध और कार्रवाई का संकल्प पहले की तरह मजबूत है। प्रधानमंत्री का संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति, विचारधारा या उद्देश्य के आधार पर स्वीकार अथवा उचित नहीं ठहराया जा सकता।
11 सितंबर 2001 को अमेरिका में आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकराया गया था, जबकि एक विमान अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन से जा टकराया। चौथा विमान पेंसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इन हमलों में हजारों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।
9/11 का हमला आधुनिक इतिहास की सबसे भयावह आतंकी घटनाओं में गिना जाता है। इसने अमेरिका के साथ पूरी दुनिया की सुरक्षा नीतियों, अंतरराष्ट्रीय यात्रा, खुफिया सहयोग और आतंकवाद विरोधी रणनीतियों को बदल दिया। हमले के बाद वैश्विक स्तर पर आतंकवादी संगठनों के वित्तीय नेटवर्क, प्रशिक्षण केंद्रों और समर्थकों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में आतंकवाद के लगातार बदलते स्वरूप की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया। आज आतंकवादी संगठन केवल हथियारों और पारंपरिक हमलों तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग, ऑनलाइन कट्टरपंथ, ड्रोन, साइबर नेटवर्क, एन्क्रिप्टेड संचार और अवैध वित्तीय लेन-देन जैसी नई चुनौतियां वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, खतरे के तरीके बदलने के बावजूद आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति स्पष्ट और अडिग है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस बात की मांग करता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ दुनिया को एकजुट रुख अपनाना चाहिए। आतंकवाद को अच्छे और बुरे की श्रेणी में बांटने अथवा किसी संगठन को राजनीतिक सुविधा के आधार पर संरक्षण देने की नीति वैश्विक सुरक्षा के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
भारत कई दशकों से सीमा पार आतंकवाद का सामना करता रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में हुए आतंकी हमलों में नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान गई है। यही कारण है कि भारत आतंकवाद के मुद्दे को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और मानवता के सामने मौजूद गंभीर चुनौती के रूप में देखता है।
प्रधानमंत्री मोदी का बयान ऐसे समय में आया है, जब विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में संघर्ष, कट्टरपंथ और आतंकवादी हिंसा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। बदलती तकनीक के कारण आतंकी संगठनों की भर्ती, प्रचार और धन जुटाने की क्षमता भी नए रूप ले रही है। इससे निपटने के लिए देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान, खुफिया सहयोग और आतंक के वित्तीय स्रोतों पर रोक लगाना आवश्यक माना जाता है।
भारत संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद की एक समान और सार्वभौमिक परिभाषा तय करने की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवादी घटनाओं की निंदा पर्याप्त नहीं है। उन्हें अंजाम देने वाले संगठनों, धन उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क और सुरक्षित ठिकाने देने वाली व्यवस्थाओं के खिलाफ ठोस कदम उठाना भी जरूरी है।
प्रधानमंत्री के संदेश में यह संकेत भी निहित है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। किसी देश में सक्रिय आतंकवादी संगठन अगर दूसरे देशों के लिए खतरा नहीं माना जाता तो यह दृष्टिकोण आगे चलकर पूरी दुनिया के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। आतंकवाद का प्रभाव सीमाओं तक सीमित नहीं रहता और इसका नेटवर्क कई देशों में फैला हो सकता है।
9/11 हमले की बरसी पर दुनियाभर में पीड़ितों को याद किया जाता है। न्यूयॉर्क सहित अमेरिका के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होते हैं। मृतकों के परिजन, अधिकारी और आम नागरिक उन लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने हमले में अपनी जान गंवाई थी। इस दिन को आतंकवाद के कारण होने वाली मानवीय क्षति की गंभीर याद के रूप में भी देखा जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। दोनों देश सुरक्षा, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और आतंकी वित्तपोषण पर रोक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात करते रहे हैं। भारत का मानना है कि आधुनिक आतंकवादी चुनौतियों का सामना कोई भी देश अकेले नहीं कर सकता।
आतंकवाद से निपटने के लिए सुरक्षा उपायों के साथ कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार को रोकना भी जरूरी है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर युवाओं को भड़काने और समाज में नफरत फैलाने की कोशिशों के खिलाफ सरकारों, तकनीकी कंपनियों एवं नागरिक संस्थाओं को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। इसके साथ मानवाधिकारों और कानून के शासन का सम्मान भी बनाए रखना होगा।
प्रधानमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दुनिया को यह संदेश दिया कि आतंकी हिंसा से प्रभावित लोगों की पीड़ा को भुलाया नहीं जाना चाहिए। आतंकवाद में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति वैश्विक समुदाय को एकजुट होकर कार्रवाई करने की प्रेरणा देती है।
मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का स्वरूप चाहे जितना बदल जाए, भारत उसके प्रत्येक रूप का विरोध जारी रखेगा। उनका संदेश वैश्विक सहयोग, साझा जवाबदेही और आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर केंद्रित रहा। 9/11 के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने एक बार फिर भारत के इस रुख को सामने रखा कि आतंकवाद मानवता के विरुद्ध अपराध है और इसके खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट रहना होगा।