इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) में कैंपस के कबाड़ को अब कला का रूप दिया गया है। यूनिवर्सिटी के 'स्वच्छता पखवाड़ा 2026' के तहत बेकार चीज़ों को स्कल्पचर और इंस्टॉलेशन में बदला गया है। स्कूल ऑफ़ परफॉर्मिंग एंड विज़ुअल आर्ट्स (SOPVA) ने जनरल एडमिनिस्ट्रेशन और कंस्ट्रक्शन एंड मेंटेनेंस डिवीज़न (CMD) के साथ मिलकर 16 से 23 सितंबर तक एक स्कल्पचर आर्ट वर्कशॉप आयोजित की। कलाकारों ने पूरे कैंपस से इकट्ठा किए गए बेकार और इस्तेमाल न होने वाले सामान से इंस्टॉलेशन बनाए, जिन्हें अब इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के कैंपस में अलग-अलग जगहों पर लगाया गया है।
इस पहल का मकसद स्वच्छता अभियान को एक रचनात्मक रूप देना था, ताकि यह दिखाया जा सके कि बेकार चीज़ों को फेंकने के बजाय उनका दोबारा इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। इसने 'स्वच्छता अभियान' और 'स्वच्छ भारत मिशन' को सस्टेनेबिलिटी और ज़िम्मेदार कचरा प्रबंधन से भी जोड़ा। आखिरी दिन, इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी की वाइस-चांसलर प्रो. उमा कंजिलाल ने प्रो. सुषमा यादव, प्रो. अशोक शर्मा और प्रो. रतन लाल के साथ मिलकर हिस्सा लेने वाले कलाकारों को सम्मानित किया।
इस पहल की तारीफ़ करते हुए, वाइस-चांसलर ने वर्कशॉप को 'स्वच्छता पखवाड़ा' की भावना की रचनात्मक अभिव्यक्ति बताया और कला व इनोवेशन के ज़रिए सस्टेनेबल तरीके विकसित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। यह वर्कशॉप SOPVA के डायरेक्टर प्रो. लक्ष्मण प्रसाद की देखरेख में आयोजित की गई थी। ये इंस्टॉलेशन अब पूरे कैंपस में लगे हैं, जो यूनिवर्सिटी के कचरे को एक ऐसी चीज़ में बदल रहे हैं जो यह याद दिलाती है कि स्वच्छता अभियान दोबारा इस्तेमाल, रचनात्मकता और सस्टेनेबिलिटी को भी बढ़ावा दे सकता है।