नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को चार महिला पहलवानों की उस अपील पर सुनवाई 28 सितंबर तक टाल दी, जिसमें रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को कथित यौन उत्पीड़न और डराने-धमकाने के मामले में बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्ट की गई इस अपील पर स्पेशल जज दिग विनय सिंह की अनुपलब्धता के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी गई है।
चार महिला पहलवानों ने ट्रायल कोर्ट के 3 अगस्त के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सिंह और तोमर को यह कहते हुए बरी कर दिया गया था कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा।
अपनी अपील में पहलवानों ने तर्क दिया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानून के हिसाब से सही नहीं है और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों का गलत मूल्यांकन किया गया था।
अपील में तोमर को आपराधिक धमकी (इंडियन पीनल कोड यानी IPC की धारा 506 पार्ट I के तहत) के आरोप में बरी किए जाने के फैसले को भी पलटने की मांग की गई है, जो शिकायतकर्ताओं में से एक ने लगाया था।
यह मामला जनवरी 2023 का है, जब कई पहलवानों (जिनमें ओलंपियन विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया शामिल थे) ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न और डराने-धमकाने का आरोप लगाया था।
पहलवानों ने WFI प्रमुख के तौर पर बृजभूषण के इस्तीफे और फेडरेशन को भंग करने की मांग की थी।
इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा से शिकायत के बाद, मैरी कॉम और योगेश्वर दत्त जैसे जाने-माने खिलाड़ियों की एक जांच समिति बनाई गई थी।
हालांकि, WFI ने अपने तत्कालीन अध्यक्ष और कोचों पर लगे आरोपों से इनकार किया था।
इसके बाद केंद्रीय खेल मंत्रालय ने विवाद के बीच WFI के कामकाज को सस्पेंड कर दिया और तत्कालीन असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को हटा दिया।
मई 2024 में आपराधिक कार्यवाही ने तब गति पकड़ी जब राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण और विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय किए। ट्रायल कोर्ट को WFI के पूर्व प्रमुख के खिलाफ़ पांच महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोपों पर आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत मिले थे।
ब्रज भूषण ने खुद को बेगुनाह बताते हुए आरोपों से इनकार किया था। ट्रायल के दौरान, उन्होंने FIR, चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का भी रुख किया था।
यह मामला ब्रज भूषण के खिलाफ़ एक नाबालिग पहलवान द्वारा दर्ज कराए गए अलग POCSO मामले से अलग है।
मई 2025 में, दिल्ली की एक अदालत ने उस मामले में दिल्ली पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट (मामला बंद करने की रिपोर्ट) को स्वीकार कर लिया, क्योंकि जांच एजेंसी ने कहा था कि उसे आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं मिला।
शिकायतकर्ता और उनके पिता ने कैंसिलेशन रिपोर्ट का विरोध नहीं किया था।
ब्रज भूषण के बरी होने के बाद, पहलवान विनेश फोगाट और टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले बजरंग पूनिया ने फैसले पर निराशा जताई और कहा कि महिला पहलवान इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगी।
X पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और उनकी कानूनी टीम को अपील दायर करने का निर्देश दिया गया है।
बयान में कहा गया, "हमें बहुत दुख है कि अदालत ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों में ब्रज भूषण शरण सिंह को दोषी नहीं पाया।"
इस बीच, BJP नेता ब्रज भूषण ने बरी होने का स्वागत किया और इसे "जूनियर खिलाड़ियों की जीत" बताया।
फैसले के बाद IANS से ​​बात करते हुए सिंह ने कहा, "यह मेरी जीत नहीं है। यह जूनियर खिलाड़ियों की जीत है। जूनियर खिलाड़ी जीते हैं। और इस मामले ने साबित कर दिया है कि ओलंपियन और ओलंपिक मेडल जीतने वाले भी अपने फायदे के लिए झूठ बोल सकते हैं।"
इससे पहले, उन्होंने इस फैसले को अपने और अपने समर्थकों के लिए "खुशी का पल" बताया था और कहा था कि अगर उन्हें दोषी भी ठहराया जाता, तो भी वे अदालत के फैसले को स्वीकार कर लेते।
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