नई दिल्ली/एकता नगर। सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर 31 अक्टूबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय एकता दिवस परेड इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास आयोजित इस भव्य समारोह में 'नक्सल-मुक्त भारत' की थीम को प्रमुखता दी जाएगी। परेड में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), उसकी विशेष कोबरा कमांडो इकाई और छत्तीसगढ़ पुलिस सहित विभिन्न राज्यों के नक्सल विरोधी सुरक्षा बल अपनी परिचालन क्षमताओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे और देश की आंतरिक सुरक्षा में योगदान देने वाले जवानों के साहस तथा समर्पण को सम्मान दिया जाएगा।राष्ट्रीय एकता दिवस के इस आयोजन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने व्यापक तैयारियां की हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बताया कि इस वर्ष एकता परेड को पहले की तुलना में अधिक भव्य, विविधतापूर्ण और आकर्षक बनाया गया है। इसका उद्देश्य देश के पुलिस बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों द्वारा किए गए कार्यों को आम नागरिकों के सामने प्रस्तुत करना है।सरकार ने इस वर्ष की परेड में सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों को विशेष महत्व देने का निर्णय लिया है। इसके तहत उन सुरक्षा बलों को परेड में शामिल किया जाएगा, जिन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों के बीच अभियान संचालित किए हैं।छत्तीसगढ़ पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवान इस कार्यक्रम में विशेष भूमिका निभाएंगे। छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इन बलों ने कई महत्वपूर्ण अभियान संचालित किए हैं। जंगलों और दुर्गम इलाकों में काम करने वाली इन इकाइयों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
डीआरजी में स्थानीय क्षेत्रों की जानकारी रखने वाले जवानों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में अभियान संचालित करने के दौरान स्थानीय भूगोल की समझ सुरक्षा बलों के लिए उपयोगी साबित होती है। वहीं, एसटीएफ विशेष रणनीतियों और प्रशिक्षित जवानों के माध्यम से सुरक्षा अभियानों में भाग लेती है।सीआरपीएफ की कोबरा इकाई भी इस परेड के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। कोबरा यानी कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन को विशेष रूप से जंगल युद्ध और नक्सल विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इस इकाई के जवान दुर्गम क्षेत्रों में लंबे अभियान चलाने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता रखते हैं।छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड की जगुआर इकाई, ओडिशा की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की ग्रेहाउंड्स, महाराष्ट्र की सी-60 कमांडो टीम, कर्नाटक की एंटी-नक्सल फोर्स और केरल की थंडरबोल्ट इकाई भी परेड में भाग लेंगी। इन सभी बलों ने अपने-अपने क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों में भूमिका निभाई है।
इस बार परेड में केवल सुरक्षा बलों का मार्च पास्ट ही नहीं होगा, बल्कि उनकी उपलब्धियों को विशेष तरीके से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, जब विभिन्न सुरक्षा बलों की टुकड़ियां प्रधानमंत्री के सामने से गुजरेंगी, तब बड़ी एलईडी स्क्रीन पर उनके महत्वपूर्ण अभियानों और योगदान से संबंधित लघु फिल्में दिखाई जाएंगी।इस व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को यह जानकारी देना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा बल किन परिस्थितियों में काम करते हैं और उन्होंने आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए क्या प्रयास किए हैं।समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) की ओर से 'नक्सल-मुक्त भारत' विषय पर विशेष नाट्य प्रस्तुति भी आयोजित की जाएगी। इसमें लगभग दो हजार कलाकार भाग लेंगे। ये कलाकार देश के उन 126 जिलों से चुने गए हैं, जो किसी न किसी समय सशस्त्र नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं।नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की कठिनाइयों, हिंसा के कारण पैदा हुई परिस्थितियों और शांति की दिशा में हुए प्रयासों को दर्शाया जाएगा। इस आयोजन में सुरक्षा के साथ सामाजिक विकास और सामान्य जीवन की बहाली का संदेश भी दिया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन 126 जिलों से लगभग पांच हजार नागरिकों को भी कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। इसका उद्देश्य उन लोगों को राष्ट्रीय समारोह में भागीदारी का अवसर देना है, जिन्होंने नक्सल हिंसा के प्रभावों को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया है।राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में सुरक्षा बलों के साथ अन्य विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसमें पुलिस बैंड, मोटरसाइकिल प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न राज्यों की भागीदारी शामिल होगी। समारोह की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भागीदारी वाले कार्यक्रमों के साथ लगभग 4,700 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी प्रस्तावित हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर की सुबह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद शाम को एकता परेड आयोजित होगी। इस आयोजन में देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को लेकर विशेष संदेश दिया जाएगा।सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देश की रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके योगदान को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।
इस बार के आयोजन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास को भी प्रमुखता दी जा रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि सुरक्षा अभियानों के साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार जैसी सुविधाओं का विस्तार भी नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए जरूरी है।गृह मंत्रालय ने 2026 में सशस्त्र नक्सलवाद के विरुद्ध हासिल उपलब्धियों को समारोह का केंद्रीय संदेश बनाया है। हालांकि, सुरक्षा अभियानों की सफलता के साथ प्रभावित इलाकों में दीर्घकालिक शांति, पुनर्वास और विकास की स्थिति का आकलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।छत्तीसगढ़ के लिए यह आयोजन विशेष महत्व रखता है क्योंकि राज्य के सुरक्षा बल लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रीय मंच पर डीआरजी और एसटीएफ जैसे बलों की भागीदारी से उनके कार्यों को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।फिलहाल एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 31 अक्टूबर की परेड में कोबरा कमांडो, सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस सहित विभिन्न राज्यों के विशेष सुरक्षा बलों की भागीदारी से देश की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया जाएगा।