सरकार की लिखित गारंटी का इंतजार, CJP ने फैसले मानने से किया इनकार

Update: 2026-07-29 15:31 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सरकार के बीच चल रहा विवाद और गहराता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आगे की कार्रवाई को लेकर सीजेपी ने अब सरकार से लिखित गारंटी की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप से यह आश्वासन नहीं देती कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाएगा, तब तक वह किसी भी आदेश या फैसले को स्वीकार नहीं करेगी।

सीजेपी की ओर से कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थिति जटिल हो गई है। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने बुधवार को सीजेपी पदाधिकारियों से मुलाकात कर न्यायालय के आदेश का हवाला दिया। प्रतिनिधियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों के मामलों में राज्य सरकारें अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती हैं। चूंकि मामला अब न्यायालय के अधीन है, इसलिए सरकार सीधे तौर पर सभी मामलों में फैसला नहीं ले सकती।

सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि बुधवार शाम सरकारी प्रतिनिधियों के निमंत्रण पर वह उनसे मिलने पहुंचे थे। इस दौरान अधिकारियों ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया। उन्होंने बताया कि आदेश के एक निर्देश में साफ कहा गया है कि मौजूदा एफआईआर की जांच आगे बढ़ सकती है। इसी बात को लेकर पार्टी अपनी मांगों को लेकर चिंतित है।

सौरभ दास के अनुसार, उन्होंने सरकार के प्रतिनिधियों से सीधा सवाल किया कि क्या वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने को लेकर लिखित गारंटी देंगे या नहीं। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। सीजेपी का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लिखित भरोसा जरूरी है।

सीजेपी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पहले प्रदर्शनकारियों से वादा किया था कि सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। पार्टी के मुताबिक, शनिवार को सरकार की ओर से मंगलवार तक कार्रवाई पूरी करने की बात कही गई थी। इसमें केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में दर्ज मामलों को भी शामिल बताया गया था। लेकिन तय समय सीमा के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

सीजेपी प्रवक्ता ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि युवाओं के साथ धोखा नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही लिखित आश्वासन नहीं दिया गया तो पार्टी देशभर में नया आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की गारंटी के खिलाफ जाने वाले किसी भी आदेश या फैसले को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को रिहा किया जाए, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। साथ ही अदालत ने फिलहाल ऐसे छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने को कहा था।

हालांकि, कोर्ट के आदेश में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामलों को लेकर अलग स्थिति बनी हुई है। इसी वजह से सीजेपी और सरकार के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। सीजेपी जहां सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग कर रही है, वहीं सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ने की बात कह रही है।

अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर सरकार लिखित आश्वासन देती है तो मामला शांत हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं होने पर सीजेपी के देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी से राजनीतिक माहौल और गरमा सकता है।

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