नई दिल्ली: कैंसर की दवाओं को किफायती बनाने की पहल के तहत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए ने संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य की सूची जारी की है। कई उत्पादों की कीमतों में बड़ी कटौती दर्ज हुई है, लेकिन कुछ प्रमुख महंगे ब्रांडों की एमआरपी में बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में मरीजों को मिलने वाली राहत उनकी निर्धारित दवा, उसकी ताकत और पैक के अनुसार अलग-अलग होगी। यह कहना सही नहीं होगा कि सूची में शामिल सभी दवाओं की कीमतें अपरिवर्तित हैं।
सरकार की 28 अक्टूबर की विज्ञप्ति के अनुसार, कंपनियों से 27 अक्टूबर तक मिली जानकारी के आधार पर 543 ब्रांडों की संशोधित एमआरपी प्रकाशित की गई थी। एनपीपीए ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों से अतिरिक्त जानकारी मिलने पर सूची लगातार अपडेट होगी। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी। इसलिए सूची जारी होने की तारीख और संशोधित दरें लागू होने की तारीख अलग हैं।
महंगे ब्रांडों में कीमतें अपरिवर्तित रहने का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मेडिकल डायलॉग्स की रिपोर्ट में कंपनी द्वारा रिपोर्ट की गई सूची के हवाले से बताया गया है कि कीट्रूडा 100 मिलीग्राम इंजेक्शन का संबंधित पैक ₹2,16,500 पर बना हुआ है। टैग्रिसो 80 मिलीग्राम की 30 गोलियों के पैक की एमआरपी ₹4,16,492.48 और इमफिन्जी 500 मिलीग्राम/10 मिलीलीटर प्रस्तुति की एमआरपी ₹1,71,324.27 अपरिवर्तित बताई गई है। ये कीमतें संबंधित पैक की हैं, पूरे उपचार की नहीं।
यहां ‘मूल लागत’ और एमआरपी का अंतर समझना जरूरी है। प्रकाशित सूची उपभोक्ता के लिए अधिकतम खुदरा कीमत बताती है। इससे दवा की वास्तविक निर्माण लागत का पता नहीं चलता। इसलिए लाखों रुपये की एमआरपी को लाखों रुपये की उत्पादन लागत बताना उचित नहीं है। इसी तरह किसी एक पैक की कीमत को मरीज के पूरे इलाज का खर्च मानना भी भ्रामक होगा।
दूसरी ओर, सरकारी विज्ञप्ति में कई उत्पादों की कीमत घटने के ठोस उदाहरण दिए गए हैं। अनारजोल 1 मिलीग्राम की 10 गोलियों का पैक पहले ₹695.76 था, जिसकी संशोधित एमआरपी ₹73 बताई गई है। एजासाइटिन 100 मिलीग्राम इंजेक्शन की कीमत ₹6,337 से घटकर ₹1,495.04 और बेवासिजैब 100 मिलीग्राम/4 मिलीलीटर वायल की कीमत ₹21,767.70 से ₹5,930.13 निर्धारित हुई है। ये उदाहरण दिखाते हैं कि कटौती का प्रभाव सभी ब्रांडों में समान नहीं है।
इस प्रक्रिया की पृष्ठभूमि में 137 चिन्हित गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं के ट्रेड मार्जिन को युक्तिसंगत बनाने का फैसला है। एनपीपीए ने 17 अक्टूबर को इसकी घोषणा की थी। सरकारी जानकारी के अनुसार, उद्देश्य वितरण और खुदरा बिक्री के स्तर पर अत्यधिक मार्जिन नियंत्रित करना तथा दवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाना है। ट्रेड मार्जिन पर नियंत्रण को हर उत्पाद की मौजूदा एमआरपी में समान प्रतिशत की कटौती समझना सही नहीं होगा।
सरकार ने खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को लागू तारीख से संशोधित कम कीमतों पर दवाएं उपलब्ध कराने और मूल्य सूची प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों को अपनी वेबसाइट पर भी संशोधित दरें दिखानी होंगी। अनुपालन सुनिश्चित करने में राज्य औषधि नियंत्रकों की भूमिका होगी। मरीज और परिजन एनपीपीए की वेबसाइट तथा ‘फार्मा सही दाम’ ऐप के माध्यम से कीमतों की जानकारी देख सकते हैं।
मरीजों के लिए व्यावहारिक राहत का आकलन निर्धारित ब्रांड, मात्रा और पैक की पुरानी तथा संशोधित कीमत मिलाकर करना होगा। प्रकाशित एमआरपी में कटौती का अर्थ हर मरीज के वास्तविक भुगतान में उतनी ही कमी होना भी नहीं है, क्योंकि कुछ मरीजों को पहले से रियायत पर दवा मिल सकती है। नई व्यवस्था का प्रभाव अंततः अस्पताल और फार्मेसी के बिल में दिखाई देने वाली कीमत से स्पष्ट होगा।