नई दिल्ली। देशभर में दुर्गा पूजा के अवसर पर इस साल आस्था, कला और सामाजिक संदेशों का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। विभिन्न राज्यों में तैयार किए गए दुर्गा पूजा पंडाल अपनी आकर्षक सजावट और अनूठी थीम के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं दुनिया की प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों और मंदिरों की प्रतिकृतियां तैयार की गई हैं, तो कहीं कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों के संघर्ष को दर्शाया गया है। इसके अलावा पेपर लीक और विरोध-प्रदर्शनों जैसे समकालीन मुद्दों को भी पंडालों की सजावट के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों की सजावट धार्मिक उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इस बार आयोजकों ने पारंपरिक धार्मिक विषयों के साथ सामाजिक मुद्दों और ऐतिहासिक धरोहरों को भी अपनी थीम में शामिल किया है। इन पंडालों के जरिए श्रद्धालुओं को देवी दुर्गा के दर्शन के साथ कला और सामाजिक विषयों को समझने का अवसर मिल रहा है।
वाराणसी में दिख रही दुनिया के प्रसिद्ध मंदिरों की झलक
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दुर्गा पूजा पंडालों को विशेष रूप से आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया है। यहां कई पंडालों को दुनिया के प्रसिद्ध मंदिरों की प्रतिकृतियों के रूप में तैयार किया गया है।इनमें कंबोडिया के विश्वप्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर की प्रतिकृति भी शामिल है। अंकोरवाट अपनी भव्य वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और अद्भुत शिल्पकला के लिए जाना जाता है।वाराणसी में इस मंदिर की संरचना को दुर्गा पूजा पंडाल के रूप में प्रस्तुत करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को अंतरराष्ट्रीय स्थापत्य कला की झलक दिखाना है। इससे धार्मिक आयोजन में सांस्कृतिक विविधता का भी समावेश हुआ है।
कोयला खदान मजदूरों के संघर्ष को दी गई जगह
इस साल कुछ दुर्गा पूजा पंडालों में कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन और संघर्ष को प्रमुख विषय बनाया गया है।इन पंडालों में मजदूरों की कठिन परिस्थितियों, मेहनत और रोजमर्रा की चुनौतियों को कलात्मक तरीके से दर्शाया गया है। इस तरह के विषयों के माध्यम से समाज के उन वर्गों की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है, जिनकी मेहनत कई उद्योगों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।धार्मिक आयोजन में मजदूरों के संघर्ष को जगह देना सामाजिक संवेदनशीलता और कला के माध्यम से संदेश पहुंचाने का उदाहरण है।
पेपर लीक और विरोध-प्रदर्शनों पर भी बनाई गई थीम
मध्य प्रदेश के जबलपुर में दुर्गा पूजा पंडालों की सजावट के जरिए समकालीन सामाजिक और राजनीतिक विषयों को उठाया गया है। यहां पेपर लीक, नागरिकता संशोधन कानून से संबंधित विरोध-प्रदर्शनों और दिल्ली में हुए प्रदर्शनों को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।इन विषयों को पंडाल की थीम में शामिल करने के पीछे सामाजिक घटनाओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास दिखाई देता है। इससे पूजा पंडाल धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक अभिव्यक्ति का मंच भी बन रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में विदेशी स्थापत्य कला की झलक
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी इस बार दुर्गा पूजा पंडालों की सजावट में अंतरराष्ट्रीय स्थापत्य कला का प्रभाव देखने को मिल रहा है।बेहाला में नेताजी सड़क आंचलिक अधिबासी वृंदा क्लब ने अपनी स्वर्ण जयंती दुर्गा पूजा के अवसर पर चीन की प्रसिद्ध लोंगमेन गुफाओं को थीम बनाया है। इन प्राचीन गुफाओं की बौद्ध मूर्तिकला और ऐतिहासिक विरासत को पंडाल की सजावट के माध्यम से दर्शाया गया है।वहीं, ठाकुरपुकुर के एसबी पार्क सार्वजनिक दुर्गा पूजा आयोजन में 'कोलियरी' थीम तैयार की गई है, जो कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों की जिंदगी पर केंद्रित है।
आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला का संगम
दुर्गा पूजा पंडालों में आकर्षक रोशनी, कलात्मक संरचनाओं और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। कोलकाता के साल्ट लेक में सांस्कृतिक संसद ने अपने पहले दुर्गा पूजा आयोजन के लिए 'राम की अयोध्या' थीम चुनी है।इस पंडाल में थ्रीडी लाइट एनिमेशन और वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक विषय को दर्शाया गया है।इस वर्ष विभिन्न राज्यों में दुर्गा पूजा पंडालों की थीम यह दर्शाती है कि धार्मिक उत्सव अब सांस्कृतिक विरासत, कलात्मक प्रयोग और सामाजिक विषयों को प्रस्तुत करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।