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नई दिल्ली। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को 278 करोड़ रुपये के CMRL-एक्सलॉजिक मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। विजयन ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए उनकी ओर से अदालत से तत्काल संरक्षण की मांग की गई थी।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने विजयन की ओर से मामले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी की आशंका है। इसलिए मामले में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है।
गिरफ्तारी की आशंका जताकर मांगी सुरक्षा
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है। उन्होंने विजयन की गिरफ्तारी या किसी अन्य कठोर कार्रवाई से सुरक्षा देने की मांग की।लूथरा ने सुनवाई के दौरान विजयन को 82 वर्षीय व्यक्ति बताते हुए कहा कि उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। हालांकि, सार्वजनिक जन्मतिथि 24 मई 1945 के अनुसार विजयन की वर्तमान उम्र 81 वर्ष है।वकील ने अदालत को बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने अनुरोध किया कि अदालत इस मामले को तत्काल सुने और अंतरिम संरक्षण प्रदान करे।
दशहरा की छुट्टियों में विशेष पीठ बनाने पर विचार
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध स्वीकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि दशहरा की छुट्टियों के दौरान मामले की सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने की संभावना पर विचार किया जाएगा।यह व्यवस्था न्यायाधीशों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। यदि छुट्टियों के दौरान विशेष पीठ का गठन संभव नहीं हुआ, तो याचिका को 26 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया जाएगा।सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह दशहरा की छुट्टियां रहेंगी और 26 अक्टूबर से नियमित न्यायिक कामकाज फिर शुरू होगा।
केरल हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती
पिनाराई विजयन ने अपनी याचिका में केरल हाईकोर्ट के आदेश की वैधता पर सवाल उठाए हैं।उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि एफआईआर दर्ज करने का निर्देश एकल न्यायाधीश ने ऐसी रिट याचिका में दिया था, जिसकी प्रकृति जनहित याचिका जैसी थी।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या संबंधित एकल पीठ को इस प्रकार की याचिका सुनने का अधिकार था। उनका तर्क था कि आरोपियों को सुने बिना ही एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया।इससे पहले 15 अक्टूबर को केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विजयन और अन्य लोगों की अपील करने की अनुमति संबंधी याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
क्या है CMRL-एक्सलॉजिक मामला?
यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है।एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस का संबंध पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा से है। आरोप है कि कंपनी को सेवाएं उपलब्ध कराए बिना भुगतान किया गया था।मामले में 2.78 करोड़ रुपये के कथित भुगतान को लेकर भी जांच चल रही है। प्रवर्तन निदेशालय और अन्य जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेनदेन से संबंधित आरोपों की पड़ताल की है।नौ अक्टूबर को केरल हाईकोर्ट ने राज्य की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को विजयन और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
विजयन की बेटी और दामाद भी मामले में नामजद
इस मामले में पिनाराई विजयन के अलावा उनकी बेटी टी. वीणा और दामाद एवं पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास का नाम भी सामने आया है।केरल की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 12 अक्टूबर को दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की थीं। विजयन, उनकी बेटी और दामाद भी संबंधित मामलों में नामजद हैं।वीणा और माकपा ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को खारिज किया है तथा जांच को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
अब 26 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के रुख के बाद पिनाराई विजयन को तत्काल न्यायिक संरक्षण नहीं मिला है। हालांकि, अदालत ने छुट्टियों के दौरान विशेष पीठ के गठन की संभावना खुली रखी है।यदि विशेष सुनवाई नहीं होती है, तो मामला 26 अक्टूबर को अदालत के सामने आएगा। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश और दर्ज एफआईआर से जुड़ी कानूनी कार्यवाही जारी है। आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना बाकी है।
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