मां की एक हिदायत ने बचाई छात्र की जान, जन्मदिन पर PG से गया था चाचा के घर
नई दिल्ली। दिल्ली के मोती बाग इलाके के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बीच एक छात्र के बाल-बाल बचने की कहानी सामने आई है। हादसे वाले पीजी में रहने वाला छात्र महज संयोग और अपनी मां की हिदायत के चलते उस वक्त वहां मौजूद नहीं था। 4 सितंबर को छात्र का जन्मदिन था और मां ने उसे जन्मदिन के मौके पर अपने चाचा के घर जाने के लिए कहा था। मां की बात मानकर छात्र पीजी से निकलकर चाचा के घर चला गया। इसी वजह से हादसे के समय वह पीजी में मौजूद नहीं था और उसकी जान बच गई।
सत्य निकेतन में हुए हादसे ने जहां कई परिवारों को चिंता में डाल दिया, वहीं इस छात्र के परिवार के लिए जन्मदिन की एक छोटी सी योजना जीवनभर याद रहने वाली घटना बन गई। छात्र जिस पीजी में रह रहा था, वहीं हादसा हुआ। यदि वह अपने जन्मदिन के कारण चाचा के घर नहीं गया होता तो हादसे के समय पीजी में ही मौजूद हो सकता था।
जानकारी के अनुसार छात्र सत्य निकेतन स्थित उसी पीजी में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था। 4 सितंबर को उसका जन्मदिन था। आम दिनों की तरह वह पीजी में ही रह सकता था, लेकिन जन्मदिन होने के कारण उसकी मां ने उसे चाचा के घर जाने की हिदायत दी। मां चाहती थी कि वह अपना खास दिन परिवार के सदस्यों के साथ बिताए। छात्र ने मां की बात मानी और पीजी छोड़कर अपने चाचा के घर चला गया।
इसके बाद सत्य निकेतन में हादसा हो गया। जब हादसे की जानकारी सामने आई तो छात्र और उसके परिवार को भी इसका पता चला। जिस जगह छात्र रोज रहता था, वहां हुए हादसे की खबर ने परिवार को झकझोर दिया। साथ ही इस बात ने राहत भी दी कि हादसे के समय छात्र वहां मौजूद नहीं था।
घटना के बाद छात्र के बचने की वजह चर्चा में आ गई। कई बार सामान्य सी लगने वाली पारिवारिक सलाह या योजना किसी व्यक्ति की जिंदगी में कितनी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, यह इस घटनाक्रम से समझा जा सकता है। छात्र की मां ने जन्मदिन पर उसे चाचा के घर जाने के लिए कहा था। उस समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही फैसला कुछ समय बाद उसके लिए बेहद अहम साबित होगा।
छात्र के लिए भी यह जन्मदिन सामान्य जन्मदिन जैसा नहीं रहा। जिस दिन वह अपना जन्मदिन मनाने के लिए पीजी से बाहर गया, उसी दौरान उसके रहने की जगह पर हादसा हो गया। एक तरफ जन्मदिन और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर था, दूसरी तरफ कुछ ही समय बाद पीजी से जुड़ी चिंताजनक खबर सामने आ गई।
सत्य निकेतन दिल्ली में छात्रों के बीच काफी जाना-पहचाना इलाका है। आसपास के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां पीजी और किराए के कमरों में रहते हैं। दूसरे राज्यों और शहरों से पढ़ाई के लिए दिल्ली पहुंचने वाले छात्रों के लिए पीजी प्रमुख आवास विकल्पों में से एक हैं। ऐसे में यहां होने वाली किसी भी घटना का सीधा असर बड़ी संख्या में छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
हादसे के बाद पीजी और आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रों के रहने वाली इमारतों में सुरक्षा मानकों का पालन कितना हो रहा है, आपात स्थिति से निपटने के क्या इंतजाम हैं और भवनों की स्थिति की नियमित जांच होती है या नहीं, जैसे सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं। बड़ी संख्या में छात्र अपने परिवार से दूर रहकर ऐसे आवासों में रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
इस हादसे ने उन अभिभावकों की चिंता भी बढ़ाई है जिनके बच्चे पढ़ाई के लिए दिल्ली में पीजी या किराए के मकानों में रहते हैं। परिवार अक्सर सैकड़ों किलोमीटर दूर होते हैं और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए भवन मालिकों तथा स्थानीय व्यवस्थाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसी घटनाएं सामने आने पर भवनों की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की आवश्यकता और अधिक महसूस होती है।
वहीं, हादसे में बाल-बाल बचे छात्र के मामले में परिवार के लिए राहत की सबसे बड़ी वजह उसका उस समय पीजी से बाहर होना है। जन्मदिन के चलते वह चाचा के घर चला गया था। यदि उसकी मां उसे चाचा के घर जाने के लिए नहीं कहती या छात्र पीजी में ही रुकने का फैसला करता तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं।
घटना के बाद यह संयोग परिवार के लिए बेहद भावुक करने वाला बन गया है। एक मां की सामान्य सी हिदायत बेटे के लिए सुरक्षा की वजह बन गई। छात्र के लिए भी 4 सितंबर की तारीख अब केवल उसके जन्मदिन के रूप में याद नहीं रहेगी, बल्कि उस दिन के रूप में भी याद रहेगी जब वह एक हादसे की चपेट में आने से बच गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सत्य निकेतन हादसे से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण बनी हुई है। हादसा कैसे हुआ, इसके पीछे क्या कारण रहे और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई लापरवाही हुई या नहीं, इन सवालों के जवाब संबंधित जांच के बाद सामने आएंगे। लेकिन हादसे के बीच सामने आई इस छात्र की कहानी ने हर किसी का ध्यान खींचा है।
छात्र के जन्मदिन पर लिया गया एक साधारण सा फैसला उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। मां ने बेटे से कहा कि जन्मदिन है तो चाचा के घर चले जाओ। बेटे ने मां की बात मान ली और पीजी से निकल गया। कुछ समय बाद वही फैसला उसकी जिंदगी में ऐसा संयोग बन गया जिसे उसका परिवार शायद कभी नहीं भूल पाएगा।