मुंबई : देश में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग लंबे समय से चर्चा में है। बैंक कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि बैंकिंग सप्ताह को छह दिन के बजाय पांच दिन का किया जाए। इस प्रस्ताव का एक आर्थिक पहलू भी है—अगर शाखाएं एक दिन कम खुलेंगी तो बिजली, सुरक्षा, हाउसकीपिंग और अन्य संचालन खर्च में कमी आ सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे बैंकों को वास्तव में बड़ी बचत होगी?

सबसे पहले ब्रांच ऑपरेशन की लागत को समझना जरूरी है। किसी बैंक शाखा को चलाने में बिजली, एसी, कंप्यूटर सिस्टम, सुरक्षा कर्मचारी, नकदी प्रबंधन, सफाई, स्टेशनरी और दूसरे कई खर्च शामिल होते हैं। अगर शाखा सप्ताह में एक दिन कम खुलेगी तो इन खर्चों में कुछ कमी निश्चित तौर पर संभव है।
हालांकि यह बचत उतनी बड़ी नहीं हो सकती, जितनी पहली नजर में दिखाई देती है। बैंक कर्मचारियों का वेतन, भवन का किराया, आईटी सिस्टम का खर्च और कई तरह के फिक्स्ड कॉस्ट ऐसे हैं, जो शाखा बंद रहने पर भी जारी रहते हैं। इसलिए पांच दिन की बैंकिंग से कुल लागत में सीमित राहत ही मिल सकती है।
इसके अलावा प्रस्तावित पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था में रोजाना काम के घंटे बढ़ाए जाने की संभावना भी जुड़ी हुई है। अगर सोमवार से शुक्रवार तक शाखाएं ज्यादा समय तक खुलती हैं तो बिजली, एयर कंडीशनिंग और स्टाफ से जुड़े कुछ खर्च फिर बढ़ सकते हैं। ऐसे में एक दिन की छुट्टी से होने वाली बचत का कुछ हिस्सा अतिरिक्त कामकाजी घंटों में खर्च हो सकता है।
डिजिटल बैंकिंग ने भी इस पूरे समीकरण को बदल दिया है। आज बड़ी संख्या में ग्राहक UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम के जरिए बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे शाखाओं पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई है। ऐसे में बैंकों के लिए शाखा संचालन का मॉडल धीरे-धीरे बदल रहा है।
पांच दिन की बैंकिंग का सबसे बड़ा फायदा शायद सीधे खर्च की बचत के बजाय कर्मचारियों की कार्यक्षमता और वर्क-लाइफ बैलेंस के रूप में दिखाई दे। लगातार लंबे समय तक काम करने वाले बैंक कर्मचारियों को अतिरिक्त साप्ताहिक अवकाश मिलने से तनाव कम हो सकता है और उत्पादकता बढ़ने की संभावना रहती है।
ग्राहकों के लिहाज से पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था कुछ चुनौतियां भी पैदा कर सकती है। खासकर ऐसे लोग जो डिजिटल बैंकिंग का कम इस्तेमाल करते हैं या जिन्हें शाखा में जाकर नकदी, चेक, दस्तावेज और अन्य सेवाओं की जरूरत होती है, उन्हें अपने बैंकिंग काम की योजना बदलनी पड़ सकती है।
ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है, जहां बैंक शाखाएं अब भी वित्तीय सेवाओं का प्रमुख माध्यम हैं। यदि शनिवार को शाखाएं बंद रहती हैं तो महीने के कुछ दिनों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ सकती है।
बैंकों के लिए फाइव-डे वीक का वास्तविक आर्थिक फायदा तभी स्पष्ट होगा, जब संचालन खर्च, अतिरिक्त काम के घंटे, कर्मचारियों की लागत और डिजिटल ट्रांजैक्शन से होने वाली बचत को एक साथ देखा जाए।
कुल मिलाकर पांच दिन का बैंकिंग सप्ताह ब्रांच के कुछ दैनिक खर्च जरूर कम कर सकता है, लेकिन इससे बैंकों को बहुत बड़ी वित्तीय बचत होगी, ऐसा कहना जल्दबाजी होगा। इसका बड़ा फायदा कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, डिजिटल बैंकिंग के विस्तार और शाखा संचालन को अधिक कुशल बनाने के रूप में सामने आ सकता है।
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