केंद्र सरकार ने ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए नए CAFE-3 यानी Corporate Average Fuel Economy नियमों की घोषणा कर दी है। इन नियमों का मकसद कार कंपनियों के पूरे वाहन बेड़े की औसत ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। नई व्यवस्था में छोटी कारों को अलग से कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इंसेंटिव जारी रखे गए हैं।
CAFE नियम किसी एक कार मॉडल पर लागू नहीं होते, बल्कि किसी कंपनी द्वारा बेचे जाने वाले पूरे वाहन बेड़े के औसत प्रदर्शन को ध्यान में रखा जाता है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अपनी सभी कारों की औसत ईंधन दक्षता और उत्सर्जन स्तर को तय मानकों के भीतर रखना होगा। नई नीति में छोटी कारों के लिए विशेष छूट की मांग लंबे समय से की जा रही थी। कुछ वाहन कंपनियों का तर्क था कि छोटी और हल्की कारें पहले से ही बड़ी SUV के मुकाबले कम ईंधन इस्तेमाल करती हैं, इसलिए उन्हें अलग राहत मिलनी चाहिए। हालांकि सरकार ने अंतिम नियमों में ऐसी किसी खास रियायत को शामिल नहीं किया है।
इसके उलट इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति जारी रखी गई है। EV मॉडल कंपनियों को CAFE लक्ष्य हासिल करने में मदद करेंगे। ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बेचने वाली कंपनियों के लिए अपने पूरे बेड़े का औसत उत्सर्जन कम रखना आसान होगा। सरकार का फोकस इस बात पर है कि आने वाले वर्षों में वाहन निर्माता पेट्रोल और डीजल कारों की ईंधन दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक और दूसरी कम उत्सर्जन वाली तकनीकों को तेजी से अपनाएं। इससे तेल की खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
CAFE-3 नियमों का असर वाहन कंपनियों की भविष्य की उत्पाद रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है। बड़ी और भारी कारें बेचने वाली कंपनियों को अपनी रेंज में ज्यादा EV, हाइब्रिड और बेहतर माइलेज वाली कारें शामिल करनी पड़ सकती हैं।
छोटी कारों को अलग राहत नहीं मिलने से कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है। वाहन निर्माताओं को केवल कार का आकार छोटा रखने के बजाय इंजन तकनीक, वजन, एयरोडायनामिक्स और इलेक्ट्रिफिकेशन पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
EV इंसेंटिव जारी रहने से इलेक्ट्रिक कार बाजार को भी फायदा मिल सकता है। इससे कंपनियों को नए इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च करने और मौजूदा EV पोर्टफोलियो का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
नई व्यवस्था का असर ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है। भविष्य में कंपनियां ज्यादा माइलेज वाली पेट्रोल कारें, हाइब्रिड मॉडल और इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने पर जोर दे सकती हैं। इसके साथ ही तकनीकी बदलावों के कारण कुछ मॉडलों की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर CAFE-3 नियमों में छोटी कारों को अलग से कोई खास राहत नहीं दी गई है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाला ढांचा बरकरार रखा गया है। आने वाले वर्षों में इन नियमों का असर भारतीय ऑटो बाजार, कंपनियों की रणनीति और नई कारों की तकनीक पर साफ दिखाई दे सकता है।
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