नौकरी छोड़ने के बाद PF अकाउंट का क्या होगा? जानें नियम

Update: 2026-08-02 10:03 GMT

बिजनेस : आज के समय में बड़ी संख्या में युवा बेहतर अवसरों, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, व्यवसाय शुरू करने या व्यक्तिगत कारणों से नौकरी छोड़कर कुछ समय का करियर ब्रेक लेते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाते में जमा रकम का क्या होगा। क्या खाता बंद हो जाएगा? क्या ब्याज मिलना बंद हो जाएगा? या फिर पूरी राशि सुरक्षित रहेगी? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियम इस संबंध में स्पष्ट हैं और अधिकांश मामलों में कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हैं।

EPFO के नियमों के अनुसार, नौकरी छोड़ने के बाद भी EPF खाता स्वतः बंद नहीं होता। कर्मचारी के खाते में जमा पूरी राशि सुरक्षित रहती है और वह उसी के नाम पर बनी रहती है। यदि कर्मचारी नई नौकरी नहीं करता और कुछ समय का करियर ब्रेक लेता है, तब भी उसका EPF खाता सक्रिय बना रहता है। ऐसे में करियर ब्रेक लेने से भविष्य निधि की जमा पूंजी पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि EPF खाते में जमा राशि पर ब्याज भी मिलता रहता है। वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि कर्मचारी नौकरी छोड़ने के बाद किसी अन्य संस्थान में कार्यरत नहीं है, तब भी उसके खाते में 58 वर्ष की आयु तक ब्याज मिलता रहता है। हालांकि, यदि कोई कर्मचारी 55 वर्ष या उसके बाद नौकरी छोड़ता है, तो उसे अधिकतम तीन वर्ष तक ही ब्याज का लाभ मिलता है। इसके बाद खाता निष्क्रिय (इनऑपरेटिव) माना जाता है और उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है।

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज निर्धारित किया गया है। हाल ही में EPFO ने करोड़ों खातों में यह ब्याज जमा भी किया है। यही कारण है कि यदि किसी कर्मचारी को तत्काल पैसों की आवश्यकता नहीं है, तो विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि वह करियर ब्रेक के दौरान भी अपनी EPF राशि खाते में ही रहने दे, ताकि उस पर ब्याज मिलता रहे और भविष्य के लिए बेहतर रिटायरमेंट फंड तैयार हो सके।

यदि किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है या वह स्वयं इस्तीफा देता है, तो नए नियमों के तहत वह अपने EPF खाते से 75 प्रतिशत तक राशि निकाल सकता है। शेष 25 प्रतिशत राशि लगातार 12 महीने तक बेरोजगार रहने के बाद निकाली जा सकती है। पहले निकासी की गणना केवल कर्मचारी के योगदान के आधार पर होती थी, लेकिन अब कर्मचारी का अंशदान, नियोक्ता का योगदान और उस पर मिला ब्याज तीनों को शामिल किया जाता है। इससे कर्मचारियों को पहले की तुलना में अधिक राशि निकालने का लाभ मिलता है।

हालांकि, EPF की निकासी करते समय टैक्स के नियमों का भी ध्यान रखना जरूरी है। यदि किसी कर्मचारी ने लगातार पांच वर्ष की सेवा पूरी नहीं की है और वह इस अवधि से पहले EPF की राशि निकाल लेता है, तो उस निकासी पर आयकर के नियम लागू हो सकते हैं। दूसरी ओर, यदि कर्मचारी ने पांच वर्ष या उससे अधिक समय तक लगातार सेवा की है, तो रिटायरमेंट, इस्तीफा, दिव्यांगता, कंपनी बंद होने या अन्य निर्धारित परिस्थितियों में EPF की निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री रहती है।

कई बार कर्मचारी शिकायत करते हैं कि ब्याज खाते में दिखाई नहीं दे रहा या क्लेम का भुगतान समय पर नहीं हुआ। EPFO के अनुसार, ब्याज जमा होने के बाद उसे पासबुक में अपडेट होने में कुछ समय लग सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में घबराने की जरूरत नहीं होती। यदि सभी दस्तावेज और केवाईसी पूरी तरह अपडेट हैं, तो ऑनलाइन EPF क्लेम सामान्यतः 7 से 10 कार्य दिवस के भीतर निपटा दिए जाते हैं।

यदि किसी सदस्य का क्लेम 20 दिनों के भीतर भी निपटाया नहीं जाता, तो वह EPFiGMS पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है। नए नियमों के अनुसार, यदि बिना किसी उचित कारण के क्लेम में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी पर 12 प्रतिशत वार्षिक दर से पेनल इंटरेस्ट लगाने का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और अनावश्यक देरी को रोकना है।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति केवल एक या दो वर्ष का करियर ब्रेक ले रहा है और उसे तत्काल पैसों की आवश्यकता नहीं है, तो EPF की राशि निकालने के बजाय उसे खाते में ही रहने देना अधिक लाभदायक हो सकता है। इससे जमा राशि पर ब्याज मिलता रहेगा और भविष्य में रिटायरमेंट या अन्य जरूरतों के लिए एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा तैयार होगी। इसलिए नौकरी छोड़ने के बाद EPF से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले नियमों को अच्छी तरह समझना और आवश्यकता के अनुसार ही निकासी करना बेहतर माना जाता है।

Tags:    

Similar News