Vedanta डीमर्जर को मिली मंजूरी, सरकार ने दी हरी झंडी

Update: 2026-07-26 11:19 GMT

बिज़नेस: अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड के बड़े डीमर्जर प्लान को एक महत्वपूर्ण मंजूरी मिल गई है। कंपनी की डीमर्जर प्रक्रिया में उस समय बड़ी प्रगति हुई, जब भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड को तेल और गैस कारोबार से जुड़े ब्लॉकों के हस्तांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी जारी कर दिया।

वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड, जिसे पहले माल्को एनर्जी लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, अब वेदांता लिमिटेड के तेल और गैस कारोबार को स्वतंत्र रूप से संभालेगी। सरकार की मंजूरी के बाद कंपनी के ऑयल एंड गैस बिजनेस को अलग इकाई के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया को मजबूती मिली है।

वेदांता लिमिटेड ने शेयर बाजारों बीएसई और एनएसई को जानकारी देते हुए बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने डीमर्जर योजना के तहत तेल और गैस संपत्तियों के हस्तांतरण को मंजूरी दे दी है। यह योजना 1 मई 2026 से प्रभावी मानी जा रही है। इसके तहत वेदांता लिमिटेड से तेल और गैस कारोबार को अलग करके वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड को ट्रांसफर किया जाएगा।

कंपनी का यह डीमर्जर प्लान वेदांता के विभिन्न कारोबारों को अलग-अलग संस्थाओं में विभाजित करने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी का उद्देश्य अपने अलग-अलग व्यवसायों को स्वतंत्र पहचान देना और प्रत्येक क्षेत्र में बेहतर विकास के अवसर पैदा करना है। डीमर्जर के बाद प्रत्येक कंपनी अपने कारोबार पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेगी।

सरकार की मंजूरी के साथ कुछ जरूरी शर्तें भी रखी गई हैं। हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय यानी डीजीएच की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि तेल और गैस ब्लॉकों से जुड़े सभी लंबित दायित्व अब नई कंपनी वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड की जिम्मेदारी होंगे।

इसके अलावा कंपनी को अपने मौजूदा अन्वेषण और उत्पादन अनुबंधों से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी। इनमें प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट यानी पीएससी, रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट यानी आरएससी और कोल बेड मीथेन यानी सीबीएम से जुड़े अनुबंध शामिल हैं।

सरकार ने ब्लॉक CB-OS/2 को लेकर भी विशेष शर्तें रखी हैं। इस ब्लॉक से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने वेदांता की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार से जुड़ी मांग की गई थी। इसके अलावा नई इकाई को संबंधित अनुबंधों के लिए नई बैंक गारंटी जमा करनी होगी।

कंपनी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सरकार से जुड़े किसी भी प्रकार के बकाये का भुगतान लंबित न रहे। सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद डीमर्जर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस मंजूरी के बाद वेदांता के तेल और गैस कारोबार को अलग पहचान मिलने की उम्मीद है। कंपनी अब रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज यानी आरओसी के पास जरूरी दस्तावेज जमा करेगी और नाम परिवर्तन समेत अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करेगी।

वेदांता का यह कदम कंपनी के भविष्य के विस्तार और निवेश रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अलग-अलग कारोबारों के स्वतंत्र संचालन से कंपनियों को अपने क्षेत्र में बेहतर निर्णय लेने और विकास की नई संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।

अनिल अग्रवाल की वेदांता पहले से ही धातु, खनन, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में बड़ा नाम है। डीमर्जर के जरिए कंपनी अपने कारोबारों को अलग-अलग इकाइयों में बांटकर निवेशकों के लिए ज्यादा पारदर्शिता और वैल्यू अनलॉक करने की कोशिश कर रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय की मंजूरी इस दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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