Business बिजनेस: गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि टैक्स नीतियों में बदलाव, कस्टम ड्यूटी में वृद्धि और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव आने वाले समय में बुलियन यानी सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के दूसरे छमाही (H2 2026) में कीमतों में उतार-चढ़ाव और कंसोलिडेशन का दौर देखने को मिल सकता है, खासकर हालिया करेक्शन के बाद बाजार में स्थिरता की उम्मीद की जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण निवेशकों की नजर अब सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बनी रह सकती है, जिससे बुलियन मार्केट में मांग और कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा।
ज्वेलरी सेक्टर से जुड़ी मांग को लेकर ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) की रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में ज्वेलरी की कुल मांग अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती है। हालांकि, त्योहारों के सीजन में इसमें सुधार की संभावना जताई गई है, खासकर हल्के वजन (लाइटवेट) ज्वेलरी की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इंडस्ट्री फिलहाल गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में संभावित सुधारों और टैक्स सिस्टम में होने वाले बदलावों पर स्पष्टता का इंतजार कर रही है। इन नीतिगत फैसलों से बाजार की दिशा तय होने की संभावना है।
इसके साथ ही, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव को भी एक अहम कारण बताया गया है, जो सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन डिमांड को फिर से बढ़ा सकता है। ऐसे हालात में निवेशक सोने को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में देख सकते हैं, जिससे कीमतों में मजबूती आ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तो बुलियन मार्केट में निवेश की मांग बढ़ सकती है, लेकिन घरेलू स्तर पर टैक्स और कस्टम ड्यूटी में बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित करेंगे।
ज्वेलरी उद्योग का कहना है कि मौजूदा समय में उपभोक्ता मांग में स्थिरता बनी हुई है, लेकिन बड़े स्तर पर वृद्धि के लिए नीतिगत स्पष्टता और आर्थिक स्थिरता आवश्यक है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में सोने-चांदी की कीमतें कई वैश्विक और घरेलू कारकों से प्रभावित होंगी, जिसमें नीतिगत बदलाव, अंतरराष्ट्रीय तनाव और त्योहारों की मांग प्रमुख भूमिका निभाएंगे।