नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत के विदेश व्यापार में जून महीने में निर्यात के मोर्चे पर अच्छी खबर सामने आई है। विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौतों और नए बाजारों की तलाश का असर भारतीय निर्यात पर दिखाई दिया है। जून में देश के निर्यात में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15.54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, आयात में इससे कहीं अधिक तेजी देखने को मिली, जिससे व्यापार घाटा बढ़कर करीब 29 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जून महीने में भारत ने कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। भारतीय उत्पादों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी है और कई नए बाजारों में निर्यातकों को अवसर मिले हैं। इसके बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और सोने के आयात में भारी बढ़ोतरी के कारण व्यापार संतुलन पर दबाव बना रहा।
आयात में पिछले साल जून की तुलना में करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी और घरेलू मांग बढ़ने के कारण कई क्षेत्रों में आयात बढ़ा है। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत अभी भी बड़ी मात्रा में दूसरे देशों पर निर्भर है।
जून में भारत ने करीब पांच अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात किया, लेकिन इसी दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और उससे जुड़े उत्पादों का आयात लगभग 24 अरब डॉलर रहा। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और अन्य तकनीकी उपकरणों के निर्माण में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल और कई महत्वपूर्ण हिस्सों की आपूर्ति अभी भी विदेशों से करनी पड़ती है।
वाणिज्य सचिव ने कहा कि भारत लगातार नए बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। अलग-अलग देशों के साथ व्यापार समझौतों और निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियों का सकारात्मक असर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी वाणिज्य सचिव ने भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया में किसी बड़ी चुनौती की संभावना नहीं है और दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है, इसलिए किसी भी नए समझौते से निर्यातकों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
भारत सरकार लगातार निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, रक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि देश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सके।
हालांकि, बढ़ता व्यापार घाटा अभी भी सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात में लगातार वृद्धि के साथ-साथ आयात संतुलन को बेहतर करना जरूरी है। इसके लिए घरेलू उद्योगों को मजबूत करना और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण पर ध्यान देना होगा।
कुल मिलाकर जून के व्यापार आंकड़े बताते हैं कि भारतीय निर्यात क्षेत्र वैश्विक दबावों के बावजूद मजबूती दिखा रहा है। लेकिन आयात में तेज वृद्धि के कारण व्यापार घाटे को नियंत्रित करना आने वाले समय में सरकार और उद्योग जगत के लिए बड़ी चुनौती बनी रहेगी।