बिजनेस : त्योहारी सीजन से पहले आम लोगों की जेब पर महंगाई का एक और झटका लग सकता है। चीनी के दामों में अचानक तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में चीनी के थोक भाव रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए हैं। कई जगहों पर थोक कीमत करीब 5,800 रुपये प्रति क्विंटल यानी लगभग 58 रुपये किलो तक पहुंच गई है। वहीं, खुदरा बाजार में भी इसके असर दिखने लगे हैं और कई शहरों में चीनी 60 रुपये किलो या उससे ज्यादा के भाव पर बिक रही है।
माना जा रहा है कि अगर कीमतों में यही तेजी जारी रही तो आने वाले दिनों में चीनी का फुटकर भाव 65 रुपये प्रति किलो के पार भी जा सकता है। त्योहारों के दौरान मिठाई, पकवान और घरेलू खपत बढ़ने से मांग में और इजाफा होने की संभावना है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
चीनी बाजार में आई इस तेजी का असर थोक मंडियों में साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चीनी के एक्स-फैक्ट्री भाव में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार जानकारों के अनुसार, कुछ जगहों पर एक्स-फैक्ट्री कीमत 5,400 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गई है। इसके बाद जीएसटी और अन्य खर्च जुड़ने से थोक कीमत और बढ़ रही है।
व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय में चीनी के दामों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कुछ बाजारों में एक महीने पहले जहां चीनी 46 से 48 रुपये किलो के आसपास मिल रही थी, वहीं अब इसके भाव 60 रुपये के करीब पहुंच गए हैं। कानपुर जैसे शहरों में भी चीनी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता है। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान, बचा हुआ स्टॉक और एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को लेकर बाजार में सप्लाई को लेकर आशंका बनी हुई है। कम स्टॉक की संभावना ने कीमतों को बढ़ाने का काम किया है।
इसके अलावा त्योहारी सीजन भी कीमत बढ़ने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों में मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में व्यापारी पहले से स्टॉक रखने लगते हैं, जिससे बाजार में कीमतों पर असर पड़ता है।
हालांकि सरकार की ओर से कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। जमाखोरी रोकने और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए स्टॉक सीमा जैसे उपाय लागू किए गए हैं। इसके बावजूद बाजार में तेजी जारी रहने से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।
चीनी महंगी होने का असर सिर्फ घर की रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव मिठाई कारोबार, होटल, रेस्टोरेंट और बेकरी उद्योग पर भी पड़ सकता है। कारोबारियों का कहना है कि अगर चीनी के भाव लंबे समय तक ऊंचे बने रहे तो मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि क्या चीनी जल्द सस्ती होगी या कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में उत्पादन, सरकारी नीतियों और सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगा कि चीनी के भाव किस दिशा में जाते हैं।
फिलहाल बाजार में चीनी की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। थोक भावों में तेजी के बाद अब नजर खुदरा बाजार पर है। अगर सप्लाई में सुधार नहीं हुआ और त्योहारों की मांग बढ़ी तो चीनी के दाम 65 रुपये किलो के पार जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
Tags: