New Delhi नई दिल्ली : देश की बैंकिंग प्रणाली में नकदी की कमी कोई नई समस्या नहीं है। लगातार बढ़ती कर्ज की मांग और वित्तीय गतिविधियों में तेजी के चलते बैंकों पर लिक्विडिटी का दबाव बना रहता है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर बैंकों को नकदी उपलब्ध कराने की कोशिश करता है, लेकिन इस बार बैंकों ने खुद के दम पर फंड जुटाने का रास्ता अपनाया।
जून महीने में जब बैंकिंग सिस्टम में नकदी का दबाव बढ़ा, तो आरबीआई ने बैंकों को अतिरिक्त कैश उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, इस बार कई बैंकों ने आरबीआई से अतिरिक्त नकदी लेने के बजाय बाजार से धन जुटाने का विकल्प चुना। यह रणनीति उनके लिए प्रभावी साबित हुई और बैंकों ने जमा प्रमाणपत्र (Certificate of Deposit – CD) के जरिए भारी मात्रा में फंड जुटा लिया।
क्लीयरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में बैंकों ने सीडी के माध्यम से कुल ₹1.80 लाख करोड़ की नकदी जुटाई। यह आंकड़ा पिछले महीनों की तुलना में काफी अधिक है और बैंकिंग सिस्टम में बढ़ती फंड जरूरत को दर्शाता है।
आंकड़ों के अनुसार, जून में सीडी जारी करने में सालाना आधार पर 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, मई की तुलना में यह वृद्धि 61.79 प्रतिशत तक पहुंच गई। मई में बैंकों ने ₹1.12 लाख करोड़ की सीडी जारी की थी, जबकि जून 2025 में यह आंकड़ा ₹1.31 लाख करोड़ रहा था। इस तरह जून 2026 में इसमें उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बैंकों द्वारा सीडी के माध्यम से अधिक धन जुटाने के पीछे कई कारण हैं। इनमें नकदी की कमी, कर्ज वितरण में तेजी, टैक्स भुगतान के चलते बाजार से पैसा बाहर जाना और जमा वृद्धि की धीमी रफ्तार शामिल हैं। इन सभी कारणों ने बैंकों को अल्पकालिक फंड जुटाने के लिए सीडी जैसे साधनों की ओर मोड़ा है।
सीएसबी बैंक के ग्रुप हेड (ट्रेजरी) आलोक सिंह के अनुसार, इस वृद्धि का मुख्य कारण बैंकिंग सिस्टम में चल रही लिक्विडिटी की कमी और कर्ज की बढ़ती मांग है। उन्होंने बताया कि जब बैंक तेजी से लोन देते हैं और जमा अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ती है, तो फंड की जरूरत बढ़ जाती है, जिसे सीडी जैसे साधनों से पूरा किया जाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक की हाल ही में जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में भी बैंकिंग सेक्टर के लिए फंडिंग को एक प्रमुख जोखिम बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में बैंकिंग प्रणाली में तरलता की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सीडी जारी करने में बढ़ोतरी मुख्य रूप से पांच बड़े सार्वजनिक और निजी बैंकों के कारण हुई है, जिन्होंने बाजार से बड़ी मात्रा में फंड जुटाया है।