Business बिजनेस: नए साल 2026 से पहले चांदी की कीमतों ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। 29 दिसंबर 2025 को MCX पर चांदी ने ₹2.54 लाख प्रति किलो का रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ। इस दौरान निवेशकों को करीब 196 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न मिला। हालांकि, इसी दिन मुनाफावसूली देखने को मिली और चांदी ₹2.33 लाख प्रति किलो पर बंद हुई। इस उतार-चढ़ाव ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि 2026 में चांदी की कीमतें और ऊपर जाएंगी या इसमें गिरावट देखने को मिलेगी।
बाजार जानकारों के मुताबिक, बीते कुछ वर्षों में चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण रहे हैं। चीन की नई औद्योगिक और आर्थिक नीतियां, वैश्विक स्तर पर चांदी की आपूर्ति में दबाव और सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में बढ़ती औद्योगिक मांग ने कीमतों को समर्थन दिया। इसके अलावा, डॉलर में कमजोरी और महंगाई की चिंता के चलते निवेशकों ने चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर चुना।
2025 के अंत तक चांदी ने सोने के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। जहां सोने में सीमित बढ़त देखने को मिली, वहीं चांदी ने तेज रफ्तार पकड़ते हुए रिकॉर्ड स्तर छू लिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि चांदी की औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर ग्रीन एनर्जी और सोलर सेक्टर में इसके उपयोग के कारण। यही वजह है कि लंबी अवधि में चांदी की कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
2026 के आउटलुक पर नजर डालें तो विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतें ₹2.80 लाख से ₹3.20 लाख प्रति किलो के दायरे तक पहुंच सकती हैं। हालांकि, यह राह पूरी तरह सीधी नहीं होगी। बीच-बीच में मुनाफावसूली, वैश्विक आर्थिक हालात और ब्याज दरों से जुड़ी खबरों के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है।
निवेश रणनीति की बात करें तो विशेषज्ञ एकमुश्त निवेश के बजाय
SIP यानी चरणबद्ध निवेश को बेहतर
मानते हैं। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होता है और औसत खरीद मूल्य संतुलित रहता है। चांदी में निवेश करने के कई विकल्प मौजूद हैं, जिनमें फिजिकल सिल्वर, सिल्वर ETF, सिल्वर फ्यूचर्स और डिजिटल सिल्वर शामिल हैं। प्रत्येक विकल्प में जोखिम और रिटर्न का स्तर अलग-अलग होता है।
फिजिकल चांदी में निवेश पारंपरिक तरीका है, लेकिन इसमें स्टोरेज और सेफ्टी की चिंता रहती है। वहीं, सिल्वर ETF और डिजिटल सिल्वर निवेशकों को आसान और सुरक्षित विकल्प प्रदान करते हैं। फ्यूचर्स में निवेश अधिक जोखिम भरा होता है और यह अनुभवी निवेशकों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में चांदी में निवेश करते समय वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। चीन और अमेरिका की आर्थिक नीतियां, ब्याज दरों में बदलाव, डॉलर की स्थिति और औद्योगिक मांग जैसे कारक कीमतों की दिशा तय करेंगे। साथ ही, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखते हुए ही चांदी में निवेश करना चाहिए।
कुल मिलाकर, चांदी ने बीते समय में मजबूत रिटर्न दिया है और आगे भी इसमें संभावनाएं बनी हुई हैं। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे में समझदारी से रणनीति बनाकर, चरणबद्ध निवेश और लंबी अवधि के नजरिए के साथ चांदी में निवेश करना निवेशकों के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।
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