Silver ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, एक साल में 130% से ज्यादा तेजी, सोना और शेयर बाजार पड़े पीछे
Business ,बिजनेस: कीमती धातुओं के बाजार में इस समय चांदी सबसे ज्यादा चर्चा में है। बीते एक साल में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। हालात ऐसे हैं कि चांदी की चमक के आगे सोना और शेयर बाजार दोनों फीके नजर आ रहे हैं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, दिल्ली में चांदी की कीमत बढ़कर 2,14,500 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, साल की शुरुआत में चांदी का भाव करीब 90,500 रुपये प्रति किलोग्राम था।
इस आंकड़े के आधार पर देखा जाए तो चांदी ने एक साल में 130 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। इतनी तेज बढ़त ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बाजार जानकारों का कहना है कि लंबे समय बाद चांदी ने निवेश के लिहाज से सोने को भी पीछे छोड़ दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग में बढ़ोतरी है। खासतौर पर सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी के इस्तेमाल से इसकी औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही वैश्विक बाजार में सप्लाई सीमित रहने से कीमतों पर दबाव बना है।
सर्राफा बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि घरेलू बाजार में भी निवेशकों और ज्वेलरी निर्माताओं की मांग बढ़ी है। शादी-ब्याह के सीजन में चांदी के आभूषणों और सिक्कों की खरीद में इजाफा हुआ है। इसके अलावा, कई निवेशक अब चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की ओर बढ़ा है। हालांकि परंपरागत तौर पर सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, लेकिन इस बार चांदी ने रिटर्न के मामले में सोने को पीछे छोड़ दिया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों में आई यह तेजी केवल घरेलू कारणों से नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक तनाव जैसे कारकों ने भी चांदी को मजबूती दी है। इसके अलावा, कई देशों में ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स बढ़ने से चांदी की औद्योगिक मांग और मजबूत हुई है।
हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी तेज बढ़त के बाद कीमतों में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत ज्यादा होता है, इसलिए इसमें निवेश करते समय जोखिम को समझना जरूरी है।
कुछ जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि में चांदी की मांग बनी रह सकती है, लेकिन अल्पकाल में बाजार की चाल वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
कुल मिलाकर, मौजूदा समय में चांदी ने निवेश बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। रिकॉर्ड कीमतों के साथ चांदी ने यह साफ कर दिया है कि वह अब केवल आभूषण तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक अहम निवेश विकल्प के रूप में उभर कर सामने आई है।