कोरोना और तनाव के बाद खुला शिपकी ला दर्रा, भारत-चीन व्यापार को मिली नई रफ्तार

Update: 2026-08-02 12:29 GMT

बिजनेस : करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित ऐतिहासिक शिपकी ला दर्रे से पारंपरिक सीमा व्यापार दोबारा शुरू हो गया है। कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा पर बढ़े तनाव के कारण वर्ष 2020 में इस व्यापार मार्ग को बंद कर दिया गया था। अब इसके दोबारा खुलने से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजगार, व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

शिपकी ला दर्रा करीब 3,930 मीटर की ऊंचाई पर सतलुज घाटी में स्थित है। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है। ऐतिहासिक रूप से यह मार्ग प्राचीन सिल्क रूट का हिस्सा रहा है और सदियों से भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का प्रमुख माध्यम रहा है। इस रास्ते से स्थानीय व्यापारी दोनों देशों के बीच जरूरी वस्तुओं का आदान-प्रदान करते रहे हैं।

इस साल शिपकी ला व्यापार मार्ग को 30 नवंबर तक के लिए खोला गया है। इसके चलते किन्नौर और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। स्थानीय व्यापारियों, परिवहन से जुड़े लोगों और पर्यटन कारोबारियों को इससे सीधा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। लंबे समय से बंद पड़े इस मार्ग के खुलने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक लौटने की उम्मीद है।

इस व्यापार की सबसे खास बात यह है कि यहां आज भी पारंपरिक बार्टर सिस्टम यानी वस्तु विनिमय व्यवस्था के तहत कारोबार किया जाता है। इसका मतलब है कि व्यापारी सामान के बदले सामान का आदान-प्रदान करते हैं। इसमें नकद लेनदेन की जगह पारंपरिक व्यापार पद्धति को प्राथमिकता दी जाती है। भारतीय व्यापारी अपना सामान सड़क मार्ग से सीमा तक पहुंचाते हैं, जिसके बाद उसे खच्चरों और अन्य भारवाहक जानवरों के जरिए तिब्बत की ओर भेजा जाता है।

व्यापार प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए नए बने छुप्पन ट्रेड मार्ट का उद्घाटन भी किया गया है। इस केंद्र पर व्यापारियों के पंजीकरण और कस्टम से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में केवल पंजीकृत व्यापारियों को ही सीमा पार व्यापार की अनुमति दी जाएगी। व्यापारियों के लिए यह नियम भी रखा गया है कि उन्हें सीमा पार व्यापार पूरा करने के बाद 72 घंटे के भीतर भारत लौटना होगा।

शिपकी ला व्यापार के तहत भारत से कई तरह के सामानों का निर्यात किया जा सकेगा। इनमें सूखे मेवे, मसाले, चाय, कॉफी, अनाज, हथकरघा उत्पाद, तांबे के बर्तन, प्रोसेस्ड फूड और औषधीय जड़ी-बूटियां शामिल हैं। वहीं, तिब्बत से पश्मीना, कच्ची ऊन, याक के बाल, भेड़ की खाल, कालीन, चाइना क्ले और पारंपरिक हर्बल उत्पाद भारत लाए जा सकेंगे।

हालांकि, इस बार व्यापार सूची में कुछ बदलाव किए गए हैं। घोड़े, बकरी और भेड़ जैसे जीवित पशुओं के व्यापार की अनुमति नहीं दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जिले में अभी क्वारंटीन व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण यह फैसला लिया गया है। भविष्य में सुविधाओं के विस्तार के बाद इस पर विचार किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिपकी ला व्यापार मार्ग का दोबारा खुलना केवल आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व भी है। सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार बढ़ने से वहां रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण रिश्तों में तनाव देखने को मिला था। ऐसे में पारंपरिक व्यापार मार्ग का दोबारा खुलना दोनों देशों के बीच संवाद और संबंधों में सुधार के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि व्यापार गतिविधियां लगातार बढ़ती हैं तो इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।

शिपकी ला मार्ग का पुनः शुरू होना हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। इससे जहां स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है, वहीं भारत-चीन के बीच पुराने व्यापारिक संबंधों को भी नई दिशा मिल सकती है।

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