मुंबई : घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। बलरामपुर चीनी मिल्स, धामपुर शुगर, डालमिया भारत शुगर, श्री रेणुका शुगर्स, उत्तम शुगर, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और ईआईडी पैरी समेत कई कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। कुछ शेयरों में करीब सात प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।शुगर स्टॉक में आई तेजी की मुख्य वजह घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी चिंता है। पिछले एक महीने में भारत में चीनी की थोक कीमतों में लगभग आठ से दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कीमत अब 4,400 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। इसे करीब सात वर्षों का उच्च स्तर बताया जा रहा है।कोल्हापुर के प्रमुख थोक बाजार में चीनी की कीमत लगभग 4,716 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची है। सीमित आपूर्ति और आगामी त्योहारों से पहले बढ़ती मांग के कारण कीमतों में तेजी बनी हुई है। बाजार को उम्मीद है कि ऊंची कीमतों से चीनी कंपनियों की आय और मुनाफे के मार्जिन में सुधार हो सकता है।
 डालमिया भारत शुगर में करीब 7% तेजी
गुरुवार के कारोबार में बलरामपुर चीनी मिल्स का शेयर लगभग तीन प्रतिशत चढ़कर 624 रुपये तक पहुंच गया। धामपुर शुगर मिल्स में करीब चार प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और शेयर 167 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।डालमिया भारत शुगर का शेयर करीब सात प्रतिशत उछलकर 439 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। उत्तम शुगर के शेयर में लगभग छह प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली और यह 268 रुपये के आसपास पहुंच गया। त्रिवेणी इंजीनियरिंग, श्री रेणुका शुगर्स और ईआईडी पैरी के शेयर भी बढ़त में रहे।
 घरेलू बाजार में क्यों बढ़ीं कीमतें
चीनी की कीमतों में तेजी की एक प्रमुख वजह नई फसल आने से पहले उपलब्ध भंडार में कमी है। रिपोर्ट के अनुसार, एक अक्टूबर से शुरू होने वाले नए चीनी सत्र की शुरुआत में भारत का स्टॉक लगभग 35 लाख टन रह सकता है, जो कई दशकों का निचला स्तर होगा।त्योहारी मौसम से पहले मिठाई और खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की मांग बढ़ने लगी है। दूसरी तरफ, कुछ चीनी मिलें भाव और बढ़ने की उम्मीद में स्टॉक धीरे-धीरे बाजार में जारी कर रही हैं। मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने के इस अंतर से थोक भाव को समर्थन मिल रहा है।गन्ने का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में भेजे जाने से भी चीनी की उपलब्धता प्रभावित होती है। सरकार की एथेनॉल मिश्रण नीति से चीनी कंपनियों को आय का वैकल्पिक स्रोत मिलता है, लेकिन गन्ने की सीमित उपलब्धता होने पर चीनी और एथेनॉल के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
 वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक ब्राजील में मौसम संबंधी समस्याओं से गन्ने की कटाई और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। ब्राजील की मिलें लाभ की स्थिति के आधार पर गन्ने के रस को चीनी या एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करती हैं। एथेनॉल की ओर अधिक गन्ना जाने पर वैश्विक बाजार में चीनी की आपूर्ति घट सकती है।यूरोप और ब्रिटेन के कई हिस्सों में गर्मी तथा प्रतिकूल मौसम से उत्पादन अनुमान प्रभावित हुआ है। थाईलैंड के उत्पादन को लेकर भी चिंता जताई गई है। विभिन्न एजेंसियों के वैश्विक घाटे के अनुमान अलग-अलग हैं, लेकिन ज्यादातर आकलन आपूर्ति में तंगी की ओर संकेत कर रहे हैं।
 भारत के निर्यात पर भी नजर
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है। हालांकि, घरेलू कीमतों और उपलब्धता को नियंत्रित रखने के लिए सरकार निर्यात नीति में सतर्क रुख अपना सकती है। निर्यात सीमित रहने से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि घरेलू बाजार में अधिक चीनी उपलब्ध हो सकती है।ऊंची चीनी कीमतें फिलहाल कंपनियों के लिए सकारात्मक मानी जा रही हैं, लेकिन शेयरों की तेजी लंबे समय तक बनी रहना कई कारकों पर निर्भर करेगा। गन्ने की उपलब्धता, उत्पादन लागत, सरकारी निर्यात नीति, एथेनॉल की मांग, न्यूनतम बिक्री मूल्य और मौसम कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।निवेशकों को केवल चीनी की बढ़ती कीमत या एक दिन की तेजी के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कंपनी के कर्ज, उत्पादन क्षमता, मार्जिन, एथेनॉल कारोबार और मूल्यांकन पर भी ध्यान देना चाहिए।
Tags: