New Delhi नई दिल्ली : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए आचार संहिता को और सख्त कर दिया है। नए नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना, हितों के टकराव को रोकना और निवेश संबंधी गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखना है। सेबी ने सेबी (कर्मचारी सेवा) (संशोधन) विनियम, 2026 को अधिसूचित करते हुए कर्मचारियों के निवेश, खुलासे और नौकरी से जुड़े प्रावधानों में व्यापक संशोधन किए हैं।
नए नियमों के तहत सेबी ने ‘परिवार’ और ‘आश्रित’ की परिभाषा को पहले से अधिक विस्तृत कर दिया है। अब इसमें गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और ऐसे व्यक्ति भी शामिल होंगे, जो किसी कर्मचारी पर काफी हद तक आर्थिक रूप से निर्भर हैं। इस बदलाव के बाद कर्मचारियों के निवेश, वित्तीय खुलासे और अन्य सेवा संबंधी नियमों का दायरा भी बढ़ जाएगा।
संशोधित नियमों में नौकरी छोड़ने वाले या सेवानिवृत्त होने वाले सेबी कर्मचारियों के लिए दो साल का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ भी लागू किया गया है। इसके तहत सेबी से इस्तीफा देने या रिटायर होने के बाद पूर्व कर्मचारी दो साल तक किसी व्यक्ति या संस्था की ओर से सेबी के सामने किसी मामले में पैरवी नहीं कर सकेंगे।
यह प्रतिबंध जांच, सुनवाई, सेटलमेंट और विभिन्न मंजूरी से जुड़े मामलों पर लागू होगा। सेबी का उद्देश्य इस प्रावधान के जरिए नियामक और निजी संस्थाओं के बीच संभावित हितों के टकराव को कम करना है।
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई सेबी कर्मचारी किसी अन्य संस्था या कंपनी में नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है तो उसे इसकी जानकारी एक महीने के भीतर सेबी को देनी होगी। इस कदम से नियामकीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और संभावित हितों के टकराव की स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
सेबी ने कर्मचारियों के निवेश नियमों को भी सख्त कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर, इक्विटी में परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव्स में कोई नया निवेश नहीं कर सकेंगे। हालांकि, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) जैसे विनियमित सामूहिक निवेश साधनों में निवेश की अनुमति जारी रहेगी।
इसके अलावा, सेबी ने कुछ विनियमित निवेश उत्पादों में निवेश की सीमा भी तय कर दी है। नए नियमों के मुताबिक ऐसे निवेश किसी कर्मचारी के कुल निवेश पोर्टफोलियो के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेंगे। हालांकि, कुछ विशेष मामलों में छूट दी गई है। इनमें कर्मचारी के जीवनसाथी को मिले एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन (ईएसओपी) और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के तहत किए गए निवेश शामिल हैं।
सेबी ने उपहार स्वीकार करने से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब कर्मचारियों को 50 हजार रुपये तक के उपहार की जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे पहले यह सीमा केवल 10 हजार रुपये तक थी। नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पारंपरिक और सामाजिक अवसरों पर मिलने वाले किन उपहारों को स्वीकार किया जा सकता है।
सेबी का कहना है कि सेवा नियमों में किए गए ये बदलाव नियामकीय व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। नए प्रावधानों से कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और बाजार नियामक के कामकाज में निष्पक्षता और पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी।