नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयातित कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है। केंद्र सरकार ने गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम’ शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना का उद्देश्य समुद्र की गहराइयों में मौजूद संभावित तेल और गैस भंडारों की खोज करना है, जिनका अभी तक पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाया है।
इस योजना के तहत सरकार अगले पांच वर्षों में गहरे पानी और अत्यधिक गहरे पानी वाले क्षेत्रों में 60 एक्सप्लोरेशन कुओं की ड्रिलिंग के लिए आर्थिक सहायता देगी। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार प्रत्येक कुएं की खुदाई लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹650 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध कराएगी। इससे तेल और गैस कंपनियों को जोखिम भरे क्षेत्रों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज बेहद महंगी और जोखिम भरी प्रक्रिया होती है। इसमें बड़ी मात्रा में पूंजी निवेश की जरूरत होती है और कई बार लंबे समय तक खोज के बाद भी व्यावसायिक उत्पादन योग्य भंडार नहीं मिल पाते हैं। इसी वजह से निजी कंपनियां अक्सर ऐसे क्षेत्रों में निवेश करने से बचती रही हैं। सरकार का मानना है कि वित्तीय सहायता मिलने से कंपनियां नई खोजों में आगे बढ़ेंगी और देश में ऊर्जा संसाधनों का नया स्रोत विकसित हो सकेगा।
एक अधिकारी के अनुसार, यह दुनिया के उन चुनिंदा बड़े कार्यक्रमों में से एक है, जहां कोई सरकार बजट के माध्यम से जोखिम वाले ऊर्जा अन्वेषण कार्यों के लिए सीधे आर्थिक मदद दे रही है। इस योजना के जरिए सरकार केवल कुओं की ड्रिलिंग में ही मदद नहीं करेगी, बल्कि साझा बुनियादी ढांचे के विकास में भी योगदान देगी। इससे कई कंपनियां एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर सकेंगी और तेल-गैस खोज से जुड़े खर्च को कम किया जा सकेगा।
योजना के तहत आवंटित ₹84,084 करोड़ के बजट में से बड़ी राशि गहरे समुद्र में ड्रिलिंग गतिविधियों के लिए रखी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, करीब ₹43,200 करोड़ की राशि विशेष रूप से 2031 तक चलने वाले पांच साल के दौरान डीप वॉटर और अल्ट्रा डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन के लिए इस्तेमाल की जाएगी। यह राशि 60 प्रस्तावित कुओं की ड्रिलिंग पर खर्च की जाएगी।
भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर तेल और गैस के नए स्रोतों की खोज सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। समुद्र मंथन योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस के कई संभावित भंडार मौजूद हो सकते हैं, लेकिन तकनीकी कठिनाइयों और अधिक लागत के कारण उनका दोहन चुनौतीपूर्ण रहा है। इस योजना से खोज गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
आईसीआरए के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, डीप वॉटर और अल्ट्रा डीप वॉटर क्षेत्रों में ड्रिलिंग काफी पूंजी आधारित और जोखिम वाली होती है। ऐसे क्षेत्रों में घरेलू कंपनियों का अनुभव अभी सीमित है, इसलिए सरकारी सहायता इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
केंद्र सरकार को उम्मीद है कि समुद्र मंथन योजना के जरिए नए तेल और गैस भंडारों की खोज होगी, जिससे भविष्य में देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। इसके अलावा घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशी आयात पर खर्च होने वाली बड़ी राशि को भी कम किया जा सकेगा। यह योजना भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास मानी जा रही है।