नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार से जुड़े नियामकीय मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। बाजार नियामक ने सेटलमेंट के नए नियम पेश किए हैं, जिनमें पात्र मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था शामिल है। इस व्यवस्था के तहत 10 लाख रुपये तक की सेटलमेंट राशि वाले मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने पर जोर दिया गया है। नए प्रावधानों का उद्देश्य नियामकीय प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और छोटे मामलों के समाधान में लगने वाले समय को कम करना है।
सेबी के इस कदम का असर शेयर बाजार से जुड़े विभिन्न पक्षों पर पड़ सकता है। इनमें बाजार मध्यस्थ, कंपनियां और नियामकीय मामलों का सामना कर रहे अन्य संबंधित पक्ष शामिल हो सकते हैं। हालांकि, फास्ट-ट्रैक सुविधा का लाभ निर्धारित पात्रता और नियमों के आधार पर ही मिलेगा।
₹10 लाख तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सुविधा
नए नियमों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 10 लाख रुपये तक की सेटलमेंट राशि वाले पात्र मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया है। इसके तहत यदि सेबी की आंतरिक समिति यह पाती है कि सेटलमेंट राशि 10 लाख रुपये तक है और मामले में अवैध लाभ की वसूली या अतिरिक्त सुधारात्मक शर्तें लागू नहीं हैं, तो सरल प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि 10 लाख रुपये से कम के सभी मामलों का स्वतः निपटारा हो जाएगा। संबंधित मामले की प्रकृति और निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।
सेटलमेंट राशि तय करने का नया फॉर्मूला
सेबी ने सेटलमेंट राशि की गणना के लिए नया फॉर्मूला आधारित ढांचा भी पेश किया है। इसमें उल्लंघन की गंभीरता, कार्यवाही किस चरण में है, पहले की नियामकीय कार्रवाइयां और मामले से जुड़े अन्य कारकों को ध्यान में रखा जाएगा।
नए नियमों के अनुसार, पहली बार आवेदन करने वालों के लिए न्यूनतम सेटलमेंट राशि तीन लाख रुपये और अन्य आवेदकों के लिए सात लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य राशि तय करने की प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता और एकरूपता लाना है।
पुराने नियमों की जगह नया ढांचा
सेबी ने 8 अक्टूबर 2026 को नए सेटलमेंट नियम प्रकाशित किए हैं। इनका नाम 'सेबी (सेटलमेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव एंड सिविल प्रोसीडिंग्स) रेगुलेशंस, 2026' है। यह व्यवस्था वर्ष 2018 के सेटलमेंट नियमों की जगह लाई गई है। नए ढांचे में प्रशासनिक और दीवानी प्रकृति की निर्धारित नियामकीय कार्यवाहियों के समाधान की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया गया है।
आवेदन की समयसीमा भी महत्वपूर्ण
नए प्रावधानों के तहत सेबी के समक्ष लंबित कार्यवाही में सामान्यतः कारण बताओ नोटिस या पूरक नोटिस मिलने के 90 दिनों के भीतर सेटलमेंट आवेदन करना होगा। जहां लागू हो, बाद में मिले पूरक नोटिस की तारीख से समयसीमा निर्धारित होगी। आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया, दस्तावेजों और भुगतान संबंधी शर्तों का पालन करना होगा।
बाजार से जुड़े पक्षों को क्या फायदा?
नई व्यवस्था का उद्देश्य छोटे और पात्र मामलों को अपेक्षाकृत जल्दी निपटाना है। इससे लंबी नियामकीय प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सकता है। सेटलमेंट की मंजूरी नियमों के अनुसार ही दी जाएगी। नए प्रावधान बाजार में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
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