नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने छोटे करदाताओं को अपनी अघोषित विदेशी आय और संपत्तियों की जानकारी देने के लिए एक बार की विशेष योजना शुरू की है। इसका नाम विदेशी संपत्ति छोटे करदाता प्रकटीकरण योजना, 2026 यानी FAST-DS रखा गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इसके नियम अधिसूचित कर दिए हैं। योजना 16 अगस्त से प्रभावी हो गई है और पात्र करदाता 31 दिसंबर, 2026 तक ऑनलाइन घोषणा दाखिल कर सकते हैं।
यह योजना ऐसे छोटे करदाताओं की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिनसे विदेश में पढ़ाई, नौकरी या अस्थायी प्रवास के दौरान प्राप्त आय या संपत्ति का विवरण आयकर रिटर्न में छूट गया था। इनमें छात्र, युवा पेशेवर, तकनीकी क्षेत्र के कर्मचारी और विदेश से भारत लौटे व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। हालांकि पात्रता संबंधित वर्षों में व्यक्ति की कर आवासीय स्थिति और योजना की अन्य शर्तों पर निर्भर करेगी।
FAST-DS के अंतर्गत घोषणा दाखिल करने के लिए दो प्रमुख श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। पहली श्रेणी में ऐसी विदेशी आय या संपत्ति आती है, जिसका पहले खुलासा नहीं किया गया और उस पर आवश्यक कर भी नहीं चुकाया गया। इस श्रेणी में अघोषित विदेशी आय और संपत्ति का कुल मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।
पहली श्रेणी के तहत करदाता को घोषित विदेशी आय या संपत्ति के उचित बाजार मूल्य पर 30 प्रतिशत कर चुकाना होगा। इसके अतिरिक्त कर के बराबर 30 प्रतिशत की अतिरिक्त राशि भी देनी होगी। इस प्रकार कुल भुगतान घोषित राशि का प्रभावी रूप से 60 प्रतिशत होगा। आवश्यक भुगतान और अन्य शर्तें पूरी करने पर करदाता को घोषित आय या संपत्ति के संबंध में आगे के जुर्माने और अभियोजन से निर्धारित सुरक्षा मिल सकती है। योजना का मूल ढांचा वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित किया गया था।
दूसरी श्रेणी में ऐसी विदेशी संपत्ति शामिल है, जिसे पहले ही कर चुकाई गई आय से खरीदा गया था, लेकिन आयकर रिटर्न के विदेशी संपत्ति वाले कॉलम में बताना छूट गया। इसमें उस अवधि में अर्जित संपत्ति भी आ सकती है, जब संबंधित व्यक्ति आयकर नियमों के अनुसार भारत में अनिवासी था और बाद में उसके लिए रिपोर्टिंग की आवश्यकता उत्पन्न हुई। इस श्रेणी में विदेशी संपत्ति की सीमा पांच करोड़ रुपये तक रखी गई है। पात्र घोषणा करने के लिए एक लाख रुपये का निर्धारित शुल्क देना होगा। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को नियमों के अनुसार जुर्माने और अभियोजन से राहत मिल सकती है।
योजना के तहत घोषित की जाने वाली विदेशी संपत्ति का उचित बाजार मूल्य 31 मार्च, 2026 की स्थिति के अनुसार निकाला जाएगा। उपलब्ध विवरण के मुताबिक यह मूल्य सामान्य रूप से संपत्ति की खरीद लागत और निर्धारित तारीख के खुले बाजार मूल्य में जो अधिक हो, उसके आधार पर तय किया जा सकता है। अलग-अलग प्रकार की संपत्तियों के लिए अलग मूल्यांकन पद्धति लागू होगी। इनमें विदेशी बैंक खाते, शेयर, प्रतिभूतियां, अचल संपत्ति, आभूषण और अन्य निवेश शामिल हो सकते हैं।
घोषणा ऑनलाइन फॉर्म 1 के माध्यम से दाखिल की जानी है। आवेदन की प्रक्रिया में दूसरे निर्धारित फॉर्म भी इस्तेमाल किए जाएंगे, जिनके माध्यम से विभाग घोषणा की पुष्टि, भुगतान की सूचना और अंतिम प्रमाणपत्र जारी करेगा। आयकर विभाग ने योजना से संबंधित प्रश्नों और उत्तरों का विस्तृत दस्तावेज भी जारी किया है।
FAST-DS सभी प्रकार के मामलों में उपलब्ध सामान्य माफी योजना नहीं है। जांच, तलाशी, अभियोजन या अन्य प्रतिबंधित परिस्थितियों से जुड़े कुछ करदाता इसके लिए अपात्र हो सकते हैं। गलत या अधूरी जानकारी देने पर घोषणा अमान्य होने का जोखिम भी रहेगा। इसलिए आवेदन से पहले पुराने आयकर रिटर्न, विदेश में रहने की अवधि, बैंक खाते, शेयर, कर्मचारी स्टॉक विकल्प और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है।
योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोगों को अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलने, उचित बाजार मूल्य निर्धारित करने और सही श्रेणी चुनने में समय लग सकता है। कर से जुड़ा मामला होने के कारण घोषणा दाखिल करने से पहले योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या कर विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी रहेगा।
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