नई दिल्ली। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से विस्तार के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS की जरूरत आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ सकती है। रूबिक्स डेटा साइंसेज की नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश में BESS की आवश्यकता वित्त वर्ष 2026-27 के करीब 34.72 GWh से बढ़कर वित्त वर्ष 2031-32 तक **236.22 GWh** पहुंचने का अनुमान है। यानी करीब पांच वर्षों में इसकी जरूरत लगभग सात गुना हो सकती है। इस क्षमता को विकसित करने के लिए करीब **3.49 ट्रिलियन रुपये यानी लगभग 3.49 लाख करोड़ रुपये** तक के निवेश की आवश्यकता पड़ सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सौर और पवन ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इन दोनों स्रोतों से बिजली उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। दिन में अधिक सौर बिजली पैदा हो सकती है, जबकि रात के समय मांग बनी रहने के बावजूद उत्पादन घट जाता है। ऐसे में BESS अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय ग्रिड में वापस सप्लाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
2026 में भारत के BESS सेक्टर ने तेज रफ्तार पकड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच देश में करीब **8.2 GWh** नई बैटरी स्टोरेज क्षमता जोड़ी गई। इसकी तुलना में 2025 की इसी अवधि में नई क्षमता 100 MWh से भी कम थी। इससे पता चलता है कि केवल एक वर्ष के भीतर बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं की तैनाती में तेज उछाल आया है।
अगस्त 2026 तक भारत में करीब **9.08 GWh BESS क्षमता ऑपरेशनल** हो चुकी थी। इसके अलावा **79.92 GWh क्षमता निर्माणाधीन**, **24.13 GWh परियोजनाएं अवार्डेड** और **63.53 GWh क्षमता टेंडरिंग के चरण में** थी। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर देश में चालू और पहचानी गई BESS परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब **176.66 GWh** तक पहुंच गई है।
रूबिक्स डेटा साइंसेज के अनुसार, यह 176.66 GWh क्षमता FY2031-32 के लिए अनुमानित 236.22 GWh जरूरत का करीब 75 प्रतिशत है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इतनी पूरी क्षमता अभी उपलब्ध है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा निर्माण, अवार्ड या टेंडरिंग जैसे विभिन्न चरणों में है। मौजूदा CEA प्रोजेक्ट पाइपलाइन में शामिल कई परियोजनाओं को FY2029-30 तक कमीशन करने का कार्यक्रम है।
रिपोर्ट में भारत की कुल ऊर्जा भंडारण जरूरत में भी बड़ी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। देश की कुल ऊर्जा स्टोरेज आवश्यकता FY2026-27 में करीब **82.37 GWh** से बढ़कर FY2031-32 में लगभग **411.4 GWh** तक पहुंच सकती है। इसमें बैटरी आधारित स्टोरेज का हिस्सा भी लगातार बढ़ेगा।
FY2026-27 में आवश्यक स्टोरेज पावर कैपेसिटी में BESS की हिस्सेदारी करीब 54 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो FY2031-32 तक बढ़कर लगभग 64 प्रतिशत हो सकती है। इसी तरह कुल ऊर्जा स्टोरेज आवश्यकता में बैटरी स्टोरेज का हिस्सा करीब 42 प्रतिशत से बढ़कर 57 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इससे साफ है कि आने वाले वर्षों में बैटरी स्टोरेज भारत के बिजली तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।
देश में BESS क्षमता फिलहाल कुछ राज्यों में ज्यादा केंद्रित है। रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात और राजस्थान मिलकर भारत की स्थापित यूटिलिटी-स्केल BESS क्षमता का करीब **88 प्रतिशत** हिस्सा रखते हैं। इसमें गुजरात की हिस्सेदारी लगभग 44 प्रतिशत और राजस्थान की 43.7 प्रतिशत है। महाराष्ट्र लगभग 5.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ इनके बाद है।
बैटरी स्टोरेज की बढ़ती जरूरत का सीधा संबंध भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से है। सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन स्थिर नहीं होता, जबकि बिजली की मांग पूरे दिन अलग-अलग स्तर पर बनी रहती है। बैटरी सिस्टम दिन में पैदा हुई अतिरिक्त सौर ऊर्जा को स्टोर करके शाम और रात के समय इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा सकते हैं।
यह जरूरत हाल के बिजली आपूर्ति दबाव के दौरान भी सामने आई है। कई राज्यों ने रात के समय बिजली की कमी से बचने के लिए अतिरिक्त आपूर्ति की मांग की है। इसके पीछे कम जलविद्युत उत्पादन, कुछ कोयला आधारित संयंत्रों का रखरखाव और पर्याप्त बैटरी स्टोरेज का अभाव भी कारणों में शामिल रहा।
केंद्र सरकार भी बैटरी स्टोरेज को बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आकलन के अनुसार, 2029-30 तक देश में 60.63 GW ऊर्जा स्टोरेज क्षमता की जरूरत हो सकती है, जिसमें 41.65 GW BESS और 18.98 GW पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स से आने की संभावना है। सरकार ने BESS की खरीद और उपयोग के दिशा-निर्देश, नेशनल फ्रेमवर्क फॉर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और विभिन्न वित्तीय सहायता उपायों को लागू किया है।
हाल ही में सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण में भी बड़े स्तर पर बैटरी स्टोरेज को शामिल किया है। इस योजना में करीब **50 GWh BESS क्षमता** विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही अक्षय ऊर्जा को ग्रिड में बेहतर तरीके से जोड़ना और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाना है।
BESS सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग भारत के लिए नए निवेश और मैन्युफैक्चरिंग अवसर भी पैदा कर सकती है। बैटरी सेल, बैटरी पैक, पावर कन्वर्जन सिस्टम, ऊर्जा प्रबंधन सॉफ्टवेयर और ग्रिड इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों में नई क्षमता विकसित करने की जरूरत पड़ेगी।
कुल मिलाकर रूबिक्स डेटा साइंसेज की रिपोर्ट संकेत देती है कि भारत का ऊर्जा संक्रमण अब केवल सौर और पवन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। इन स्रोतों से पैदा होने वाली बिजली को सही समय पर इस्तेमाल करने के लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण जरूरी होगा। FY2031-32 तक 236.22 GWh BESS की अनुमानित जरूरत और करीब 3.49 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश से यह सेक्टर आने वाले वर्षों में देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन सकता है।
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