UPI Charge: यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होने की खबर के बाद डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यूपीआई पर शुल्क लगाए जाने के बाद इसके जरिए होने वाले लेनदेन की संख्या कम हो जाएगी। इस मुद्दे पर अब भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की है। उनका कहना है कि मामूली शुल्क से यूपीआई ट्रांजेक्शन की संख्या पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सवाल का जवाब दिया। उनसे पूछा गया था कि यूपीआई पर MDR लगाए जाने के बाद क्या डिजिटल पेमेंट की रफ्तार धीमी हो सकती है। इस पर उन्होंने कहा कि फिलहाल ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में किसी तरह की गिरावट दिखाई नहीं दे रही है और व्यक्तिगत तौर पर उन्हें नहीं लगता कि छोटा सा शुल्क यूपीआई ट्रांजेक्शन की संख्या पर बड़ा असर डालेगा।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह व्यवस्था करीब छह साल तक चली जीरो-MDR प्रणाली के बाद बड़ा बदलाव मानी जा रही है। हालांकि यह शुल्क हर तरह के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा।
सबसे अहम बात यह है कि पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P यूपीआई ट्रांजेक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। इसका मतलब है कि अगर आप किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति को सीधे यूपीआई से पैसे भेजते हैं तो उस पर यह MDR लागू नहीं होगा।
ग्राहक नहीं, मर्चेंट पर होगा शुल्क
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर MDR का भुगतान व्यापारी करेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सितंबर में कहा था कि यह राशि सरकार के पास नहीं जाएगी, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े सेवा प्रदाताओं, एग्रीगेटर, POS सेवा देने वालों और मर्चेंट बैंक के बीच जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि इसे ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए। यानी सामान्य ग्राहक के नजरिए से देखें तो यूपीआई के जरिए भुगतान करने की प्रक्रिया में फिलहाल सीधा अतिरिक्त चार्ज देने की बात नहीं है। यही वजह है कि आरबीआई गवर्नर भी मान रहे हैं कि इसका ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर असर सीमित रह सकता है।
किन ट्रांजेक्शन पर लगेगा कितना शुल्क?
2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर सामान्य MDR 0.4 प्रतिशत रखा गया है। 75,000 रुपये और उससे अधिक की ट्रांजेक्शन पर इसे अधिकतम 300 रुपये तक सीमित किया गया है।इसके अलावा रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे जरूरी या कम मार्जिन वाले कुछ सेक्टरों के लिए 2,000 रुपये से अधिक की ट्रांजेक्शन पर फ्लैट 5 रुपये MDR का प्रावधान रखा गया है। म्यूचुअल फंड,
सिक्योरिटीज
, स्टॉक ब्रोकर्स और डीलर्स से जुड़े यूपीआई भुगतान पर कम दर यानी 0.02 प्रतिशत MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा
इस बदलाव से पहले यूपीआई ट्रांजेक्शन लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। सितंबर 2026 में यूपीआई के जरिए करीब 24.07 अरब यानी 2,407 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए। अप्रैल से सितंबर की अवधि में यूपीआई ट्रांजेक्शन की संख्या सालाना आधार पर करीब 27 प्रतिशत बढ़ी और इनकी कुल वैल्यू लगभग 177 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।यह आंकड़ा बताता है कि यूपीआई अब भारत में रोजमर्रा के भुगतान का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े रिटेल स्टोर और ऑनलाइन शॉपिंग तक इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है।
क्या दुकानदार UPI से बचना शुरू करेंगे?
MDR लागू होने के बाद एक आशंका यह भी है कि कुछ कारोबारी बड़े यूपीआई भुगतान स्वीकार करने से बच सकते हैं। हालांकि यह असर कितना होगा, इसका आकलन नई व्यवस्था लागू होने के बाद ही साफ हो पाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई अभी भी कार्ड जैसे कई अन्य डिजिटल पेमेंट माध्यमों के मुकाबले सस्ता और सुविधाजनक रहेगा। इसी वजह से इसके इस्तेमाल में अचानक बड़ी गिरावट आने की संभावना कम मानी जा रही है।इसके अलावा छोटे व्यापारियों के एक वर्ग को राहत भी दी गई है। छोटे P2PM मर्चेंट, जिनका यूपीआई के जरिए मासिक रिसीविंग एक तय सीमा तक है, उनके भुगतान पर MDR लागू नहीं होने की व्यवस्था बताई गई है।
MDR आखिर होता क्या है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो किसी डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी से लिया जाता है। कार्ड पेमेंट में यह व्यवस्था पहले से मौजूद है। यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय तक कई ट्रांजेक्शन पर जीरो-MDR रखा गया था।अब बड़ी मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े सेवा प्रदाताओं की लागत को कुछ हद तक कवर करना माना जा रहा है।
आम ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?
फिलहाल आम ग्राहक के लिए सबसे राहत की बात यही है कि व्यक्ति से व्यक्ति को भेजे जाने वाले यूपीआई भुगतान मुफ्त बने रहेंगे। रोजमर्रा के छोटे भुगतान पर भी असर सीमित रहने की उम्मीद है।अगर आप किसी दुकान पर बड़ा भुगतान कर रहे हैं, तो वहां MDR व्यापारी पक्ष पर लागू हो सकता है। नियमों के अनुसार इस शुल्क को सीधे ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए। इसलिए उपभोक्ता को भुगतान करते समय किसी भी अतिरिक्त शुल्क की मांग पर सावधानी बरतनी चाहिए।
कुल मिलाकर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने के बाद यूपीआई के भविष्य को लेकर सवाल जरूर उठे हैं, लेकिन आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का मानना है कि इतना छोटा शुल्क ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर बड़ा असर नहीं डालेगा। भारत में यूपीआई की सुविधा, तेज गति और व्यापक स्वीकार्यता को देखते हुए फिलहाल डिजिटल भुगतान की रफ्तार मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। असली तस्वीर 15 अक्टूबर के बाद नई व्यवस्था लागू होने पर धीरे-धीरे साफ होगी।
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