Mumbai: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी (लिक्विडिटी) को मैनेज करने के लिए वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी का सहारा लिया है। इसके जरिए केंद्रीय बैंक ने करीब ₹2.23 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से सिस्टम से बाहर किया है। RBI का यह कदम बैंकिंग प्रणाली में संतुलन बनाए रखने और छोटी अवधि की ब्याज दरों को नियंत्रित रखने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।

VRRR नीलामी क्या होती है?
VRRR यानी Variable Rate Reverse Repo एक ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए RBI बैंकों से अतिरिक्त पैसा कुछ समय के लिए लेता है और बदले में उन्हें ब्याज देता है।जब बैंकिंग सिस्टम में नकदी ज्यादा हो जाती है, तो RBI इस तरह के ऑपरेशन के जरिए अतिरिक्त धन को वापस खींच सकता है।
लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर RBI का फोकस
RBI समय-समय पर बाजार में नकदी की स्थिति पर नजर रखता है। जरूरत के अनुसार केंद्रीय बैंक पैसे डालने या निकालने के लिए अलग-अलग उपाय करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा नकदी होने से महंगाई और ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है, इसलिए संतुलित लिक्विडिटी बनाए रखना जरूरी होता है।
बैंकों और बाजार पर असर
VRRR नीलामी के जरिए सिस्टम से नकदी कम होने पर बैंकों के पास उपलब्ध अतिरिक्त फंड में बदलाव आ सकता है। इससे मनी मार्केट की दरों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसका असर व्यापक रूप से बाजार की अन्य स्थितियों, महंगाई के आंकड़ों और RBI की मौद्रिक नीति पर भी निर्भर करता है।
RBI की निगरानी जारी
केंद्रीय बैंक लगातार बैंकिंग सिस्टम की नकदी स्थिति की समीक्षा करता रहता है। आगे भी जरूरत के अनुसार RBI लिक्विडिटी को संतुलित करने के लिए ऐसे कदम उठा सकता है।

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