नई दिल्ली : भारत में सदियों से नीम, बबूल और अन्य पेड़ों की टहनियों से दातुन करने की परंपरा रही है। लेकिन 1930 के दशक में देश में एक ऐसा बदलाव आया, जिसने लोगों की दांत साफ करने की आदत को पूरी तरह बदल दिया। साल 1937 में भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर मंजन और टूथपाउडर जैसे आधुनिक उत्पादों की शुरुआत हुई, जिसने आगे चलकर ओरल केयर उद्योग को एक बड़े बाजार में बदल दिया। उस दौर में ज्यादातर भारतीय परिवार दातुन, राख, नमक या घरेलू नुस्खों से दांत साफ करते थे। टूथपेस्ट और मंजन जैसी चीजें आम लोगों की पहुंच से दूर थीं। धीरे-धीरे भारतीय कंपनियों ने देशी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंजन और टूथपाउडर बनाना शुरू किया।

1937 में बदली दांत साफ करने की आदत
1937 के आसपास भारत में संगठित तरीके से मंजन बनाने की शुरुआत हुई। उस समय भारतीय बाजार में विदेशी कंपनियों के उत्पाद मौजूद थे, लेकिन उनकी कीमत और उपलब्धता सीमित थी। भारतीय उद्यमियों ने स्थानीय जड़ी-बूटियों और पारंपरिक तरीकों को आधुनिक पैकेजिंग के साथ पेश किया। मंजन ने लोगों को दातुन के विकल्प के रूप में एक नया तरीका दिया। धीरे-धीरे शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक इसका इस्तेमाल बढ़ने लगा।
आयुर्वेद और आधुनिक बाजार का मेल
भारत में मंजन की लोकप्रियता बढ़ने का एक बड़ा कारण इसमें इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्री रही। नीम, लौंग, बबूल, नमक और अन्य प्राकृतिक तत्वों को शामिल कर कई कंपनियों ने इसे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक बनाया।
समय के साथ टूथपाउडर और फिर टूथपेस्ट का दौर आया। कंपनियों ने दांतों की सफाई के साथ कैविटी, मसूड़ों की सुरक्षा और ताजगी जैसे दावों के साथ नए उत्पाद बाजार में उतारे।
दातुन वाले देश में बना बड़ा ओरल केयर बाजार
आज भारत का ओरल केयर बाजार दुनिया के बड़े बाजारों में शामिल है। टूथपेस्ट, टूथब्रश, माउथवॉश और हर्बल प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधुनिक ओरल केयर उत्पादों की पहुंच बढ़ी है।
बड़ी कंपनियों के साथ-साथ कई आयुर्वेदिक और स्वदेशी ब्रांडों ने भी इस क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। अनुमान के मुताबिक भारत का ओरल केयर उद्योग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
विज्ञापन ने बदली लोगों की सोच
1950 और 1960 के दशक के बाद टूथपेस्ट कंपनियों ने विज्ञापनों के जरिए लोगों को नियमित ब्रश करने और टूथपेस्ट इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। टीवी और अखबारों में आने वाले विज्ञापनों ने ओरल हाइजीन को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया।
अब दांत साफ करना केवल सफाई नहीं बल्कि स्वास्थ्य और व्यक्तित्व से जुड़ा विषय बन चुका है।
5 लाख करोड़ तक पहुंचा बड़ा कारोबार
आज ओरल केयर से जुड़ा बाजार कई लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुका है। इसमें टूथपेस्ट, टूथब्रश, हर्बल मंजन, इलेक्ट्रिक ब्रश और अन्य उत्पाद शामिल हैं। बदलती जीवनशैली, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और नए उत्पादों की मांग ने इस उद्योग को लगातार विस्तार दिया है।
1937 में शुरू हुआ मंजन का सफर आज एक विशाल उद्योग में बदल चुका है। दातुन की परंपरा से शुरू हुई कहानी अब आधुनिक तकनीक और ब्रांडेड ओरल केयर उत्पादों तक पहुंच गई है।

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