बिजनेस : भारतीय शेयर बाजार के लिए नया कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा रहने वाला है। निवेशकों की नजर इस सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक, प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी कारकों का संयुक्त प्रभाव घरेलू शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच आयोजित होनी है। बैठक के अंतिम दिन आरबीआई गवर्नर नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे। निवेशकों की सबसे अधिक नजर रेपो रेट और केंद्रीय बैंक के भविष्य के रुख पर रहेगी। यदि ब्याज दरों में कोई बदलाव होता है या आगे की मौद्रिक नीति को लेकर कोई संकेत मिलता है, तो उसका असर बैंकिंग, ऑटो, रियल एस्टेट और अन्य ब्याज दर संवेदनशील क्षेत्रों के शेयरों पर देखने को मिल सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों का सिलसिला भी जारी रहेगा। कई बड़ी और मझोली कंपनियां अपने अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी। निवेशकों की नजर विशेष रूप से डीएलएफ, भारती एयरटेल, ओएनजीसी, हीरो मोटोकॉर्प, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और भारतीय स्टेट बैंक जैसी कंपनियों के प्रदर्शन पर रहेगी। इन कंपनियों के नतीजे संबंधित क्षेत्रों के शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजित मिश्रा का कहना है कि इस सप्ताह आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है। उनके अनुसार, तिमाही नतीजों के अलावा वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा प्रमुख समुद्री मार्गों से कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं।
ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर. का मानना है कि इस सप्ताह निवेशकों का फोकस पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर रहेगा। उनका कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए महंगाई और चालू खाते के संतुलन पर दबाव बढ़ा सकती हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की गतिविधियां भी इस सप्ताह बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। लगातार चार महीनों तक बिकवाली करने के बाद जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में जोरदार वापसी की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के दौरान एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 20,200 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि आकर्षक वैल्यूएशन, बेहतर कॉरपोरेट नतीजे और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार के कारण विदेशी निवेशकों का रुख सकारात्मक हुआ है। यदि यह निवेश जारी रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है।
इसके अलावा निवेशकों की नजर इस सप्ताह विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों सहित अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर भी रहेगी। ये आंकड़े देश की आर्थिक गतिविधियों की स्थिति का संकेत देंगे और बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विशेषज्ञ सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतकों और बेहतर कॉरपोरेट नतीजों के दम पर भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख बना रह सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि निवेशकों को आरबीआई के नीतिगत फैसलों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया था। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स लगभग 2,035 अंक यानी 2.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी करीब 616 अंक यानी 2.59 प्रतिशत मजबूत हुआ। इस तेजी ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह घरेलू और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सभी आर्थिक और वैश्विक संकेतकों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए।