नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए शुरू की गई FCNR-B स्वैप सुविधा को तय समय से पहले बंद करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने इस सुविधा की समय सीमा करीब एक महीने घटा दी है। माना जा रहा है कि उम्मीद से अधिक फंड आने और इस व्यवस्था को बनाए रखने की बढ़ती लागत को देखते हुए RBI ने यह कदम उठाया है।

RBI ने 14 अगस्त को जानकारी दी थी कि इस योजना के तहत भारत में कुल 56.8 अरब डॉलर का फंड आया है। इसमें से करीब 52.3 अरब डॉलर FCNR-B डिपॉजिट के जरिए प्राप्त हुए हैं। इस मजबूत प्रतिक्रिया के बाद केंद्रीय बैंक ने स्वैप सुविधा की अंतिम तारीख को आगे बढ़ाने के बजाय इसे जल्दी समाप्त करने का निर्णय लिया।

पहले यह सुविधा 30 सितंबर 2026 तक जारी रहने वाली थी, लेकिन अब RBI ने इसकी समय सीमा घटाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है।

FCNR-B स्वैप सुविधा का उद्देश्य

FCNR-B यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) Deposit से जुड़ी यह सुविधा विदेशों में रहने वाले भारतीयों और बैंकों के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाना और रुपये पर पड़ रहे दबाव को कम करना था। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और डॉलर की मजबूती के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखना RBI की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

FCNR-B डिपॉजिट के माध्यम से बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने का मौका मिलता है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है।

उम्मीद से ज्यादा मिला रिस्पॉन्स

RBI के अनुसार, इस सुविधा को बाजार से अपेक्षा से बेहतर प्रतिक्रिया मिली। बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने के बाद केंद्रीय बैंक को लगा कि निर्धारित लक्ष्य काफी हद तक पूरा हो चुका है।

कुल 56.8 अरब डॉलर की राशि जुटने से विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने में मदद मिली है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इतना बड़ा फंड आने के बाद इस सुविधा को लंबे समय तक जारी रखने की जरूरत कम हो गई थी। यही कारण है कि RBI ने इसे समय से पहले बंद करने का फैसला लिया।

लागत बढ़ने की चिंता

जानकारों का कहना है कि FCNR-B स्वैप सुविधा को जारी रखने की लागत भी एक बड़ा कारण हो सकती है।

जब RBI ऐसी सुविधाओं के जरिए डॉलर जुटाता है तो उसे भविष्य में उससे जुड़ी वित्तीय लागत वहन करनी पड़ती है। रुपये पर दबाव की स्थिति में यह लागत और बढ़ सकती है।

ऐसे में बड़ी मात्रा में फंड आने के बाद इस योजना को जारी रखना केंद्रीय बैंक के लिए महंगा साबित हो सकता था।

गवर्नर के बयान के बाद बदला फैसला

RBI का यह निर्णय इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे करीब एक सप्ताह पहले RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि इस सुविधा को समय से पहले बंद करने की कोई योजना नहीं है।

हालांकि, इसके बाद बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने और बाजार की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने अपनी रणनीति में बदलाव किया।

RBI का यह कदम बताता है कि केंद्रीय बैंक बाजार की परिस्थितियों और आर्थिक जरूरतों के आधार पर अपनी नीतियों में बदलाव कर सकता है।

रुपये पर दबाव के बीच अहम फैसला

हाल के समय में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय रुपये पर दबाव देखने को मिला है।

ऐसे समय में विदेशी मुद्रा का मजबूत रहना बेहद जरूरी होता है। FCNR-B स्वैप सुविधा से आए फंड ने विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से संकेत मिलता है कि RBI अब बाजार में जरूरत के अनुसार ही हस्तक्षेप करेगा और अतिरिक्त लागत से बचने की कोशिश करेगा।

आगे RBI की रणनीति पर नजर

अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि RBI विदेशी मुद्रा बाजार में आगे किस तरह के कदम उठाता है।

केंद्रीय बैंक लगातार रुपये की चाल, विदेशी निवेश, डॉलर की स्थिति और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम पर नजर रख रहा है।

FCNR-B स्वैप सुविधा को समय से पहले बंद करना इस बात का संकेत है कि RBI ने मौजूदा परिस्थितियों में अपनी जरूरत के अनुसार विदेशी मुद्रा जुटाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

फिलहाल विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति, रुपये की मजबूती और वैश्विक बाजार की गतिविधियां आने वाले समय में भारतीय मुद्रा बाजार की दिशा तय करेंगी।

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