नई दिल्ली। देश में रसोई गैस (LPG) की सप्लाई को किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों तथा अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए LPG के अधिकतम उत्पादन की सीमा तय की है। इसका उद्देश्य भविष्य में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं को लगातार LPG उपलब्ध कराना है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 13 अगस्त को इस संबंध में एक आदेश जारी किया है। आदेश के तहत देश की 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए इमरजेंसी प्रोडक्शन क्षमता निर्धारित की गई है।

सरकार के इस फैसले के बाद देश में LPG आपूर्ति के लिए एक स्थायी आपातकालीन व्यवस्था तैयार होगी। अगर किसी कारण से आयात, परिवहन या वैश्विक बाजार में बदलाव के चलते LPG की सप्लाई प्रभावित होती है तो इन कंपनियों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

21 कंपनियों को दिया गया लक्ष्य

पेट्रोलियम मंत्रालय के आदेश के अनुसार, 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों को आपात स्थिति के लिए अधिकतम LPG उत्पादन क्षमता निर्धारित करने को कहा गया है।

इन सभी कंपनियों की कुल उत्पादन क्षमता करीब 63,810 टन प्रतिदिन बताई गई है। सरकार का मानना है कि यह अतिरिक्त क्षमता देश की दैनिक LPG खपत के लगभग 70 प्रतिशत के बराबर है।

इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि किसी भी संकट के समय घरेलू गैस सिलेंडर की उपलब्धता पर बड़ा असर न पड़े।

सप्लाई संकट से निपटने की तैयारी

भारत में LPG की मांग लगातार बढ़ रही है। उज्ज्वला योजना और बढ़ते घरेलू कनेक्शनों के कारण देश में रसोई गैस की खपत में काफी वृद्धि हुई है।

ऐसे में सरकार का ध्यान केवल नियमित सप्लाई पर नहीं, बल्कि आपात परिस्थितियों के लिए भी मजबूत व्यवस्था तैयार करने पर है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बदलाव, युद्ध जैसी परिस्थितियां, समुद्री मार्गों में बाधा या अन्य कारणों से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में घरेलू LPG की उपलब्धता बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होती है।

नई व्यवस्था इसी चुनौती से निपटने के लिए तैयार की गई है।

रोजाना खपत का बड़ा हिस्सा सुरक्षित होगा

सरकार द्वारा तय की गई इमरजेंसी उत्पादन क्षमता भारत की रोजाना LPG खपत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कवर करेगी।

इसका मतलब है कि अगर किसी कारण से LPG की सामान्य सप्लाई में कमी आती है तो घरेलू उत्पादन बढ़ाकर बाजार में गैस की उपलब्धता बनाए रखी जा सकेगी।

अधिकारियों का मानना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और आम उपभोक्ताओं को संभावित संकट से बचाने में मदद करेगा।

रिफाइनरियों और कंपनियों की भूमिका बढ़ेगी

नई व्यवस्था के तहत रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों को अपनी उत्पादन क्षमता और आपातकालीन तैयारी बनाए रखनी होगी।

कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जरूरत पड़ने पर निर्धारित सीमा तक LPG उत्पादन बढ़ाया जा सके। इसके लिए उन्हें तकनीकी क्षमता, कच्चे माल की उपलब्धता और संचालन व्यवस्था को तैयार रखना होगा।

यह कदम सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, LPG केवल एक ईंधन नहीं बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों की दैनिक जरूरत है। इसलिए इसकी निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना ऊर्जा सुरक्षा का अहम हिस्सा है।

सरकार पहले भी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ऊर्जा स्रोतों में विविधता जैसे कदम उठा चुकी है। अब LPG उत्पादन क्षमता तय करना इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से भारत की आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है और आपात स्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया दी जा सकती है।

उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा

इस फैसले का सीधा फायदा आम LPG उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में गैस सिलेंडर की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर हिस्से में रसोई गैस की नियमित आपूर्ति बनी रहे और किसी भी आपात स्थिति में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश के बाद संबंधित कंपनियां अपनी तैयारियों को मजबूत करेंगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था देश की LPG सप्लाई सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

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